बंद खदानों के ट्रांजिट पास पर निकल रहे मेजर मिनरल्स: सिहोरा क्षेत्र में अनुमति से ज्यादा चल रही खदानों में खुदाई, टी पी की हो रही खरीद फरोख्त

जबलपुर, यश भारत। सिहोरा क्षेत्र में एक ओर जहां मुरुम के नाम पर मेजर मिनरल की चोरी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ एक और गंभीर मामला सामने आया है। जहां पर ट्रांजिट पास की खरीद बिक्री का काम भी जोरों पर चल रहा है। जहां कई बंद पड़ी खदानों या फिर कम माइनिंग वाली खदानों के ट्रांजिट पास ज्यादा खुदाई करने वाले माफियाओं के द्वारा खरीदे जा रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। ओवरलोडिंग और एक टीपी पर कई गाड़ियां निकालने की बात तो जब तब सामने आती रहती है लेकिन दूसरी खदान की टी पी के नाम पर खनिज की चोरी के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसे समझे मामला
सरकार द्वारा जब खदान की लीज बनाई जाती है तो उसे दौरान निर्धारित किया जाता है कि उसमें से कितना खनिज निकाला जाएगा और प्रति महीने की भी लिमिट तैयार की जाती है, लेकिन बहुत सी खदान ऐसी होती हैं जहां पर लिमिट से ज्यादा खुदाई की जाती है, परंतु ट्रांजिट पास की लिमिट पहले से तय होती है। ऐसे में लिमिट के ऊपर की खुदाई को कानूनी रूप देने के लिए कम खुदाई करने वाली खदानों के ट्रांजिट पास के माध्यम से उन्हें लीगल रूप दिया जाता है।
राजस्व का होता है नुकसान
इस मामले में सबसे ज्यादा नुकसान मेजर मिनरल की चोरी में हो रहा है, क्योंकि बहुत सी खदान है ऐसी है जो की मुरुम और लेटराइट के नाम से स्वीकृत है। लेकिन उनसे मेजर मिनरल निकल रहे हैं। जब कि आधिकारिक रूप से उन्हें मुरुम या लेटराइट की ही टीपी मिल सकती है। ऐसे में वे दूसरी खदानों से मेजर मिनरल की टीपी लेकर इस पूरे कारनामे को अंजाम देते हैं।
यहां होती है जरूर
जबकि चोरी किए गए खनिज का परिवहन लोकल स्तर पर किया जाता है तो फिर ओवरलोडिंग या फिर एक टी पी में कई गाड़ियां निकाल कर चोरी हो जाती है। जब रेलवे के माध्यम से खनिज को दूसरे राज्यों में भेजना होता है या फिर एक्सपोर्ट करना होता है तो फिर वजन के अनुसार ही ट्रांजिट पास की आवश्यकता होती है। फिर बंद पड़ी खदानों या कम खनन वाली खदानों की अतिरिक्त ट्रांजिट पास खरीदे जाते हैं।






