
20 केंद्रों पर महिला समूहों ने की थी 4,73,364 क्विंटल गेहूं की खरीदी
जबलपुर, यश भारत।एक तरफजहां प्रदेश सरकार महिलाओं को सशक्त करने के लिए स्व सहायता समूहों को उपार्जन के कार्य से जोड़ रही है, वहीं ढाई महीने का समय बीत जाने के बाद भी उपार्जन कार्य में मिलने वाले प्रासंगिक व्यय का भुगतान नहीं किया गया है। मामला गेहूं उपार्जन का है, जहां 20 स्व सहायता समूहों को उपार्जन की जिम्मेदारी दी गई थी। इनके द्वारा 4,73,364 टल गेहूं की खरीदी की गई थी। तुलाई और स्टैकिंग का भुगतान स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया गया था और उन्हें 13 रुपए प्रतिटिल के हिसाब से 61 लाख 53 हजार 732 रुपए दिए जाने थे, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह राशि उनके खाते में नहीं पहुंची है।
फूड कंट्रोलर की मनमानी
इस पूरे मामले में फूड कंट्रोलर सीमा बैरसिया की भूमिका सामने आ रही है। जिन को बार-बार आवेदन देने के बाद भी स्व सहायता समूहों के अकाउंट वेरिफाई नहीं किए जा रहे हैं। प्रक्रिया के तहत जिन खातों में भुगतान किया जाता है, उनके लिए फूड कंट्रोलर जबलपुर के पास
पूड कंट्रोलर नहीं कर रहीं अकाउंट वेरिफाई, भोपाल में अटकी राशि
13 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 61 लाख 53 हजार 732 रुपए का होना है भुगतान
आवेदन किया जाता है और फिर उन खातों का वेरिफिकेशन फूड कंट्रोलर द्वारा किया जाता है, जिसके बाद भोपाल से संबंधित खाते में । व्यवस्था यह है कि भुगतान भुगतान कर कर दिया दिया जाता है। व्य जैसे-जैसे किसानों को भुगतान होता जाता है, उसी मात्रा में प्रासंगिक व्यय का भुगतान भी समहू के खातों में कर दिया जाता है और अकाउंट वेरिफिकेशन का कार्य उपार्जन अवधि
के दौरान ही होता है, क्योंकि महिलाओं के पास इतने पैसे नहीं होते कि वे अपने पास से प्रासंगिक व्यय का भुगतान कर सकें। लेकिन पूरी उपार्जन प्रक्रिया बीत चुकी है और उसके बाद भी ढाई महीने का समय गुजर गया है, फिर भी सीमा बैरसिया अकाउंट वेरिफाई करने को तैयार नहीं हैं, जबकि महिलाएं बार-बार कलेक्ट्रेट कार्यालय के चक्कर काट रही हैं।
दलाली का है पूरा खेल
क्योंकि कमीशन की राशि और प्रासंगिक व्यय की राशि मिलाकर लगभग 41 रुपए प्रति क्विंटल होता है, जिसमें से प्रासंगिक व्यय की राशि पहले आती है और उसके बाद कमीशन की राशि आती है। यह राशि मिलाकर लगभग 1 करोड़ 94 लाख रुपए होगी। इस पर अधिकारियों की नजर गड़ी हुई है। क्योंकि अन्नपूर्णा वेयरहाउस में स्व सहायता समूह के मामले में बड़ी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें कुछ अधिकारी भी नप चुके हैं। ऐसे में अधिकारियों की अभी हिम्मत नहीं पड़ रही है कि समूह का जो भुगतान है, उसमें अपने कमीशन की राशि मांग सकें। ऐसे में अधिकारियों द्वारा भुगतान ही रोक दिया गया है। जब मामला ठंडा हो जाएगा, उसके बाद उन्हें भुगतान किया जाएगा, जिसमें से अधिकांश राशि दलालों और अधिकारियों द्वारा डकार ली जाएगी। इसी कारण अकाउंट वेरिफिकेशन का कार्य रोका गया है, क्योंकि अकाउंट वेरिफाई होने के बाद स्वतः भोपाल से स्व सहायता समूहों के खातों में भुगतान हो जाएगा, जिस पर जबलपुर में पदस्थ अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। इसी कारण यह पूरा खेल खाद्य विभाग में बैठकर खेला जा रहा है।







