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कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार में 100 साल बाद लौटे जंगली भैंसे : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 हेक्टेयर के बाड़े में किया स्थानांतरित

बालाघाट। मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। लगभग एक सदी बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम से लाए गए आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से निकालकर 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तैयार किए गए बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया।

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इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश की जलवायु, पर्यावरण और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाना है, ताकि भविष्य में उन्हें सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में स्थापित किया जा सके। वन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में सूपखार क्षेत्र में कुल 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह महत्वपूर्ण दिन है। लगभग 100 वर्षों के अंतराल के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण शुरू हुआ है।

उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से आठ जंगली भैंसों को लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर मध्यप्रदेश लाया गया है। इन वन्यजीवों को पहले निर्धारित अवधि तक क्वारंटाइन में रखा गया, ताकि उनकी निगरानी की जा सके और वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की पुनर्स्थापना से प्रदेश के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद परिस्थितियों के अनुरूप जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में स्थापित करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे

जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के अंतर्गत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था।

पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से तैयार किए गए एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में रखा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को भी उसी बाड़े में लाया गया।

इस प्रकार कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन किया गया। इस दौरान उन्हें स्थानीय जलवायु और पर्यावरण के अनुरूप ढालने के साथ उनकी निगरानी की गई।

क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर में निर्मित बड़े बाड़े में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कराई। अब इस बड़े बाड़े में उनके व्यवहार, अनुकूलन और अन्य आवश्यक गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने की योजना

वन विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लंबे समय से विलुप्त हो चुके हैं। इस प्रजाति को प्रदेश में दोबारा स्थापित करने के उद्देश्य से विशेष पुनर्स्थापना योजना तैयार की गई है।

सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर इस स्थान को परियोजना के लिए चुना गया है। यहां उपयुक्त प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुनर्स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

परियोजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को सूपखार क्षेत्र में बसाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में लाए गए आठ जंगली भैंसे इस दिशा में शुरुआती महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस परियोजना की सफलता के लिए वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य की निगरानी, पर्याप्त भोजन-पानी, अनुकूल आवास और प्राकृतिक परिस्थितियों में उनके व्यवहार पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। इन प्रयासों से भविष्य में जंगली भैंसों की आबादी को स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नौरादेही में चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी प्रदेश सरकार की अन्य पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य विकसित कर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना तैयार करने की दिशा में पहल की गई है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवासों के विकास और विभिन्न प्रजातियों की पुनर्स्थापना के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी और नौरादेही में चीतों के लिए नए आवास की पहल इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद क्षेत्र के विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने बालाघाट जिले और आसपास के क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के नए अवसर सामने आए हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थिति बेहतर होने से विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों में यह उनका बालाघाट जिले का चौथा दौरा है।

उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्रीय विकास को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि प्राकृतिक संपदा का संरक्षण प्रदेश की प्राथमिकताओं में शामिल है।

कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

सूपखार परिक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्रीमती समिता राजोरा, मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगतसिंह नेताम, बालाघाट के पुलिस उप महानिरीक्षक श्री विनीत जैन, कलेक्टर श्री कुमार सत्यम और पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य मिश्रा उपस्थित रहे।

इसके अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य श्रीमती मौसम बिसेन, पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनुपमा नेताम, श्री रविंद्र मणि त्रिपाठी, कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक श्री प्रकाश वर्मा, उप संचालक (कोर) सुश्री अमिथा के.बी., उप संचालक (बफर), समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी और स्थानीय वन अमला भी कार्यक्रम में मौजूद रहा।

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना मध्यप्रदेश में जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लगभग एक सदी बाद इस प्रजाति को क्षेत्र में दोबारा स्थापित करने का प्रयास वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष महत्व रखता है।

हालांकि, इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता जंगली भैंसों के सफल अनुकूलन, सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य प्रबंधन और भविष्य में उनकी आबादी बढ़ने पर निर्भर करेगी। यदि निर्धारित योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में सूपखार क्षेत्र मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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