कैसी कही – फितरती मंत्री बनाम प्रमोटी आईएएस, जिलों की पोस्टिंग पर गर्माया मामला

कैसी कही – फितरती
मंत्री बनाम प्रमोटी आईएएस, जिलों की पोस्टिंग पर गर्माया मामला
प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में 76 अधिकारियों की सीधे जिलों में तैनाती का मामला इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में खूब चर्चा बटोर रहा है। मामला तब तूल पकड़ गया जब विभागीय मंत्री को पता चला कि प्रमोटी आईएएस अधिकारी ने जिलों में तैनाती के आदेश जारी कर दिए हैं। कहते हैं मंत्री जी को यह तरीका रास नहीं आया। अंदरखाने की खबर है कि संबंधित अधिकारी से जवाब तलब भी किया गया है।
अब हाल यह है कि मंत्री और अधिकारी के बीच की अदावत अफसरशाही की चाय चर्चा का मसाला बन चुकी है। उधर जिन अधिकारियों को जिलों में भेजा गया है वे भी थोड़ा असमंजस में हैं जाएं या पहले माहौल साफ होने का इंतजार करें। सूत्र बताते हैं कि कुछ अधिकारी तो मंत्री जी के सामने अपनी बात रखने भी पहुंच चुके हैं। अब फैसला क्या होगा पोस्टिंग कायम रहेगी या फिर आदेश पलटेंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल गलियारों में एक ही चर्चा है कि अगली तबादला सूची में किसी का नाम सरप्राइज पैकेज बनकर सामने आ सकता है।
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छुट्टी के दिन आया साहब का फोन, बोले ऑफिस पहुंचो ज्वाइन करना है
राजधानी में हाल ही में पदभार संभालने वाले एक नवागत साहब ने ज्वाइनिंग का ऐसा अंदाज दिखाया कि मातहतों की छुट्टी भी छुट्टी नहीं रही। हुआ यूं कि अवकाश के दिन अचानक फोन की घंटी बजी और उधर से आदेश मिला कि ऑफिस पहुंचिए ज्वाइन करना है। अब साहब का आदेश हो और मातहत न पहुंचें ऐसा कैसे हो सकता था। छुट्टी का मूड तुरंत खत्म हुआ और अधिकारी कर्मचारी दफ्तर पहुंच गए। साहब ने बिना ज्यादा औपचारिकता के पदभार ग्रहण किया और आते ही साफ संदेश दे दिया कि काम में कसावट चाहिए। परिचय सत्र खत्म होते ही साहब तो पुराने साहब की विदाई पार्टी में रवाना हो गए मगर दफ्तर में कर्मचारी देर तक मौजूद रहे।
अब कर्मचारियों के बीच चर्चा यह है कि जब ज्वाइनिंग ही छुट्टी के दिन हो सकती है तो आगे का कैलेंडर कैसा रहेगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि रविवार को भी वर्किंग डे घोषित हो जाए।
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तबादला सूची पर उठ रहे सवाल
प्रदेश के 26 आईएएस अधिकारियों की हालिया तबादला सूची ने भी कई भौंहें चढ़ा दी हैं। आधिकारिक तर्क यह दिया गया कि अधिकारियों को उनके काम के आकलन के आधार पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं मगर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा कुछ और ही है। कहते हैं जिन अधिकारियों का प्रदर्शन अच्छा बताया जाता था उन्हें लूप लाइन में भेज दिया गया जबकि जिनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे उन्हें फिर से जिलों की कमान सौंप दी गई। अंदरखाने की मानें तो कुछ अधिकारियों ने अपनी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया तो कुछ को राजधानी में मौजूदगी का लाभ मिल गया। सूत्र यह भी बताते हैं कि तबादले के जो मापदंड तय किए गए थे उनका पालन होता नजर नहीं आ रहा। अब यह सूची प्रशासनिक निर्णय ज्यादा है या राजनीतिक गणित यह बहस अभी जारी है।
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मंत्री जी का स्लीप मोड वीडियो वायरल
प्रदेश सरकार के एक मंत्री अक्सर अपने सफाई अभियान के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं लेकिन इस बार मामला थोड़ा उलटा पड़ गया। मंत्री जी ने इस बार सोते समय का वीडियो शूट कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। बस फिर क्या था पोस्ट वायरल हुई और यूजर्स ने मजेदार टिप्पणियों की झड़ी लगा दी। किसी ने लिखा सपने भी शेयर कर देते तो पूरा पैकेज मिल जाता। तो किसी ने तंज कसा कि नेताओं ने भाषण दौरे और मीटिंग के वीडियो तो बहुत डाले पर सोते हुए का वीडियो पहली बार देखा। खैर सोशल मीडिया का जमाना है यहां हर प्रयोग चर्चा बन जाता है। अब मंत्री जी का यह प्रयोग प्रचार की रणनीति था या सिर्फ नया अंदाज यह तो वही जानें लेकिन यूजर्स ने इसे गजब एक्टिंग जरूर बता दिया।







