
नई दिल्ली,एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 60 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। जहां फरवरी के अंत में कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह 113 डॉलर के पार पहुंच चुका है।
इस संकट का सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न बाधाएं हैं, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति की lifeline माना जाता है। मौजूदा हालात में यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है।
वहीं, उत्पादन स्तर पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। कतर की ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से उसकी LNG निर्यात क्षमता में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट आई है। दूसरी ओर, इराक ने अपने तेल क्षेत्रों में ‘फोर्स मेज्योर’ लागू कर दिया है, जिससे उत्पादन 33 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी WTI क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है, जबकि भारत में MCX पर कच्चे तेल के दाम 9,600 रुपये प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति बाधित रहने का सिलसिला जारी रहा, तो वैश्विक उत्पादन में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी बनी रह सकती है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
गोल्डमैन सैक्स ने भी 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि मार्च-अप्रैल के लिए यह अनुमान 110 डॉलर रखा गया है।







