Vishwakarma Puja 2026 : देवताओं के वास्तुकार क्यों कहलाते हैं भगवान विश्वकर्मा, जानिए पौराणिक मान्यता
मेहनत और हुनर का देते हैं संदेश

यशभारत,जबलपुर। विश्वकर्मा पूजा निर्माण, शिल्प, तकनीक और मशीनों से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। भारतीय धार्मिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए भव्य नगरों, भवनों, रथों और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा केवल वास्तुकला और निर्माण के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि मेहनत, हुनर, सृजन और कुशलता का भी संदेश देते हैं।
निर्माण और वास्तुकला के अधिष्ठाता
आचार्य मदन मोहन बताते हैं कि भारतीय परंपरा में किसी व्यक्ति या शक्ति के विशेष योगदान के प्रति सम्मान प्रकट करने की परंपरा रही है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण कला, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल का अधिष्ठाता माना जाता है। यही कारण है कि कारीगर, इंजीनियर, बढ़ई, शिल्पकार और मशीनों से जुड़े लोग विश्वकर्मा पूजा को विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
कई दिव्य निर्माणों से जुड़ी हैं मान्यताएं
पौराणिक कथाओं और महाकाव्य परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा का संबंध कई महत्वपूर्ण निर्माणों से बताया गया है। मान्यता के अनुसार उन्होंने सोने की लंका, भगवान कृष्ण की द्वारका और देवताओं के लिए दिव्य भवनों का निर्माण किया था। पुष्पक विमान और इंद्र के वज्र जैसे दिव्य अस्त्रों के निर्माण का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इन कथाओं का विवरण अलग-अलग मिलता है।
त्रिशूल और सुदर्शन चक्र से भी संबंध
कुछ पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को भगवान शिव के त्रिशूल और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के निर्माण से भी जोड़ा जाता है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार सूर्य के अत्यधिक तेज को कम करने के बाद उससे प्राप्त दिव्य ऊर्जा का उपयोग विभिन्न दिव्य अस्त्रों के निर्माण में किया गया। इन्हीं मान्यताओं के कारण विश्वकर्मा को दिव्य अस्त्रों और शिल्पकला से भी जोड़ा जाता है।
मशीनों और औजारों की होती है पूजा
विश्वकर्मा पूजा के दिन फैक्ट्रियों, कारखानों, कार्यशालाओं और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों तथा औजारों की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन मशीनों और उपकरणों की साफ-सफाई की जाती है और उन्हें सजाकर भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के साथ यह परंपरा काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और श्रम के प्रति सम्मान का प्रतीक भी मानी जाती है।
मेहनत और हुनर का देते हैं संदेश
विश्वकर्मा पूजा का महत्व केवल मशीनों और औजारों की पूजा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे श्रम, सृजन और कौशल के सम्मान का भाव भी जुड़ा है। भगवान विश्वकर्मा की आराधना यह संदेश देती है कि किसी भी काम को लगन, ईमानदारी और कुशलता के साथ करना महत्वपूर्ण है। इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा को मेहनतकश लोगों, कारीगरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के सम्मान के पर्व के रूप में भी देखा जाता है।







