दो लाख लोग बूंद-बूंद पानी को मोहताज,एक टाइम सप्लाई से मचा हाहाकार
मानसून की देरी ने बढ़ाई मुसीबत,परियट बांध सूखने की कगार पर,टैंकरों से सप्लाई में नगरनिगम फेल

जबलपुर,यशभारत। जबलपुर शहर इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है। गर्मी का प्रकोप, मानसून की देरी और जलाशयों में लगातार घटते जलस्तर ने हालात इतने गंभीर बना दिए हैं कि नगर निगम को कई इलाकों में जलापूर्ति घटाकर सिर्फ एक समय करनी पड़ रही है। पानी की कमी का सीधा असर करीब दो लाख से अधिक लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। शहर की पेयजल व्यवस्था का बड़ा हिस्सा परियट बांध और खंदारी जलाशय पर निर्भर है। लेकिन बारिश नहीं होने और लगातार बढ़ते तापमान के कारण जल स्रोत तेजी से खाली हो रहे हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार परियट जलाशय में अब केवल 7.5 फीट पानी बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो मौजूदा जल भंडार से जलापूर्ति असंभव हो जायेगी।
एक टाइम पानी, पूरे दिन की परेशानी
जल संकट के चलते रांझी जल शोधन संयंत्र से संचालित होने वाले कई इलाकों में केवल सुबह एक बार ही पानी की सप्लाई की जा रही है। कुलीहिल, संजय नगर, अधारताल, शोभापुर, बजरंग नगर, रांझी मरघटाई, मानेगांव, बिलपुरा, मढ़ई, शारदा नगर पानी की टंकी से सप्लाई होने वाले कई क्षेत्रों समेत अनेक कॉलोनियों के रहवासी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय मिलने वाला पानी पूरे दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई परिवारों को पानी स्टोर करने के लिए अतिरिक्त बर्तन खरीदने पड़े हैं, जबकि जिन घरों में पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था नहीं है, वहां स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। सुबह पानी भरने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कई जगहों पर पानी का दबाव भी बेहद कम है।
भीषण गर्मी में बढ़ी मुश्किलें
जबलपुर में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में पानी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई है। नहाने, पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है। गर्मी के कारण जल स्रोतों का तेजी से वाष्पीकरण हो रहा है, जिससे उपलब्ध पानी का स्तर और तेजी से घट रहा है। यही वजह है कि प्रशासन को जल संरक्षण के लिए आपूर्ति सीमित करने का निर्णय लेना पड़ा है।
मानसून की राह देख रहा शहर
शहरवासियों की निगाहें अब मानसून पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग की ओर से बारिश के संकेत जरूर दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित वर्षा नहीं होने से चिंता बढ़ती जा रही है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो जल संकट और गहरा सकता है। प्रशासन के सामने भी पेयजल व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
हर साल बनता है संकट, लेकिन नहीं मिला स्थायी समाधान
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जबलपुर में हर साल गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति बनती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए जाते। जल संरक्षण, नए जल स्रोतों के विकास और वर्षा जल संचयन जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित नजर आती हैं। परिणामस्वरूप हर वर्ष हजारों परिवारों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त टैंकर भेजे जाएं, जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए।
आने वाले दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं
परियट जलाशय में बचा हुआ सीमित जल भंडार प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यदि बारिश में और देरी होती है तो शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ऐसे में जल संकट केवल एक प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि लाखों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।







