उपार्जन समिति बनी शोभा की सुपारी समितियों की मर्जी से बन रहे केंद्र
कर्मचारी तय कर रहे कहां होगी खरीदी, कहां नहीं करेंगे काम

जबलपुर, यश भारत। जिले में 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होना थी, लेकिन खरीदी शुरू होना तो दूर, अभी तक केंद्रों की सही तरीके से स्थापना भी नहीं हो सकी है। पूरे मामले में उपार्जन समिति केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
पहले समिति द्वारा मनमर्जी से केंद्रों की सूची तैयार की गई और अब नया मामला सामने आ रहा है, जिसमें सहकारी समितियां ही तय कर रही हैं कि कहां खरीदी करेंगी और कहां नहीं। जानकारी के अनुसार कई केंद्र ऐसे हैं जहां कर्मचारियों के दबाव में नियमों के विरुद्ध केंद्र स्थापित कर दिए गए, जबकि कुछ स्थानों पर केंद्र बनने के बाद भी समितियां काम करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सारी व्यवस्था कर्मचारियों की मर्जी से ही चलनी है, तो फिर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका क्या रह जाती है।
चल रहा मनमर्जी का दौर
अधिकारियों ने कई स्थानों पर केंद्र स्थापित कर दिए हैं, लेकिन समितियों के कर्मचारी वहां खरीदी के लिए कार्यालय कलेक्टर जबलपुर
तैयार नहीं हैं। कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारी उन्हें मनाने में लगे हुए हैं। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर उपार्जन समिति किस दबाव में काम कर रही है। वहीं कुछ केंद्र ऐसे भी हैं, जिन्हें कर्मचारियों के दबाव में स्थापित किया गया है, जिससे विभागीय अधिकारियों और समितियों के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
स्पष्ट दिख रहे दोहरे मापदंड
एक ओर कुछ समितियां यह कहकर काम से इनकार कर रही हैं कि केंद्र दूर हैं, वहीं दूसरी ओर 20 से 25 किलोमीटर दूर स्थापित केंद्रों पर वही समितियां काम करने को तैयार हो जाती हैं। इससे साफहै कि दूरी का तर्क केवल सुविधा और स्वार्थ के आधार पर दिया जा रहा है।







