दुर्गम राक्षस वध की चलित झांकी बनेगी आकर्षण
पारिजात बिल्डिंग चेरीताल में चल रही तैयारी

दुर्गम राक्षस वध की चलित झांकी बनेगी आकर्षण
पारिजात बिल्डिंग चेरीताल में चल रही तैयारी
जबलपुर यश भारत।नवरात्रि की मौके पर दुर्गा उत्सव समितियां के द्वारा एक तरफ जहां शहर में देश विदेश की अलग-अलग अनुकृतियों का निर्माण किया जा रहा है तो दूसरी तरफ आज भी चलित झांकियों का अपना अलग आकर्षण है और इसी के तहत नव जागृति दुर्गा उत्सव समिति परिजात बिल्डिंग चेरीताल के द्वारा इस वर्ष दुर्गम राक्षस वध की चली झांकी का प्रदर्शन किया जाएगा जिसकी तैयारी समिति के सदस्यों के द्वारा जारी है।
समिति के अध्यक्ष धीरेंद्र मिश्रा धीरू ने जानकारी देते हुए बताया कि समिति के द्वारा लगभग 50 वर्षों से माता रानी की स्थापना की जा रही है और समिति के द्वारा अभी तक अनेक अनुकृति और झांकियों का निर्माण किया जा चुका है जो चर्चित भी रही है और इसी श्रृंखला में इस बार समिति ने दुर्गम राक्षस वध की चली जाती प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है। श्री मिश्रा ने बताया कि दुर्गम राक्षस के बारे में मान्यता है कि इसी के वध के बाद आदिशक्ति का नाम दुर्गा पड़ा था।
पाताललोक सीता बनी महाकाली और अग्निपथ जैसी झांकियां का किया जा चुका है निर्माण समिति के सक्रिय सदस्य और वर्तमान में झांकी के निर्माण में लगे रंजीत यादव और बल्लू पटेल ने बताया कि पूर्व वर्षों में समिति के द्वारा पाताललोक सीता बनी महाकाली गंगा अवतरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ शुंभ निशुंभ वध अग्निपथ दक्ष यज्ञ नागलोक जैसी अनेक झांकियां निर्मित की जा चुकी हैं और इन्हें श्रद्धालुओं की सराहना भी प्राप्त हुई। श्री पटेल और श्री यादव के अनुसार समिति के सभी सदस्य इस कार्य में लगे हैं और पंचमी के दिन से झांकी का प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। झांकी के निर्माण में करीब 5 लाख रूपी अनुमानित खर्च बताया गया है।
आकर्षक विद्युत साज सज्जा और विशेष भंडारा
समिति सदस्यों का कहना है कि समिति के द्वारा पंडाल के आसपास आकर्षक विद्युतसाज सज्जा तो की ही जाती है लेकिन चलित झांकियों मे लाइट एवं साउंड इफेक्ट का भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहता है और समिति के द्वारा इसे प्रभावी ढंग से पूरा किया जाता रहा है। समिति के द्वारा प्रतिवर्ष विशेष भंडारा भी आयोजित किया जाता है जिसमें मातारानी के दर्शनार्थ आये श्रद्धालुओं को समिति के सदस्य बैठाकर प्रसाद परोसते हैं और भक्त ग्रहण करते हैं।







