आठ साल से इंतज़ार, घमापुर फ्लाईओवर अब भी कागजों में, डेढ़ लाख लोगों की राह में रोज जाम
बढ़ती लागत के बीच निर्णय का इंतजार

जबलपुर,यशभारत। शहर के घमापुर क्षेत्र में यातायात की बढ़ती समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित फ्लाईओवर का इंतजार करीब आठ साल से जारी है। वर्ष 2019 में लगभग 269 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद वर्ष 2024 में करीब 800 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव सामने आया, बावजूद इसके अब तक शासन स्तर से निर्माण को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
फ्लाईओवर निर्माण में हो रही देरी का सीधा असर घमापुर के साथ आधारताल, सुहागी, महाराजपुर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम हो गया है।
आठ साल में दो प्रस्ताव, निर्माण अब भी दूर
घमापुर क्षेत्र की यातायात समस्या को देखते हुए वर्ष 2019 में करीब 269 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था। उम्मीद थी कि जल्द ही स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन योजना प्रस्तावों और प्रक्रियाओं के बीच अटक गई। करीब छह वर्ष बाद वर्ष 2024 में इसकी लागत बढ़कर लगभग 800 करोड़ रुपये किए जाने का नया प्रस्ताव सामने आया। इसके बाद भी निर्माण कार्य को शासन की अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी।
डेढ़ लाख लोगों को रोज होती है परेशानी
आधारताल, सुहागी, महाराजपुर सहित आसपास के इलाकों की बड़ी आबादी घमापुर मार्ग से होकर गुजरती है। अनुमानित डेढ़ लाख नागरिकों को रोजाना जाम और धीमे यातायात की समस्या का सामना करना पड़ता है। पीक आवर्स में स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर बनने से यातायात का दबाव कम हो सकता है और आवागमन सुगम हो जाएगा।
बढ़ती लागत के बीच निर्णय का इंतजार
आठ वर्षों में प्रस्तावित लागत में हुई बड़ी वृद्धि भी योजना की रफ्तार पर सवाल खड़े कर रही है। वर्ष 2019 के 269 करोड़ रुपये के प्रस्ताव से वर्ष 2024 में लागत करीब 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अब लोगों की नजर शासन की स्वीकृति पर है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में बढ़ते यातायात के साथ समस्या और गंभीर हो सकती है।








