डिजिटल अरेस्ट मामला : जालसाजों के खाते किए गए सीज, छह दिन घर में कैद रहे वृद्ध दंपति
13 दिन तक निगरानी में रखा

जबलपुर,यशभारत। सीबीआई अधिकारी बनकर जालसाजों ने डिफेंस कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय वृद्ध और उनकी पत्नी को मनी लॉन्ड्रिंग व ड्रग्स मामले में फंसाने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपियों ने दंपति को करीब छह दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने दिया। परिवार या किसी परिचित से संपर्क करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई। भयभीत दंपति ने आरोपियों के बताए खातों में करीब 22 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
सिविल लाइंस पुलिस के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रकाश पॉल शेजवाल ने शिकायत दर्ज कराई है। 22 जुलाई को उनके मोबाइल पर अलग-अलग नंबरों से कॉल आए। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स मामले की जांच में उनका नाम सामने आया है। इसके बाद सीबीआई के नाम से फर्जी सरकारी नोटिस भेजकर दंपति को विश्वास में लिया गया।
एफडी तुड़वाकर कराई रकम ट्रांसफर
जालसाजों ने मामला खत्म करने और जांच से बचाने का झांसा देकर वृद्ध की करीब 21 लाख रुपए की एफडी तुड़वा दी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। ठगी की रकम हासिल करने के बाद आरोपियों ने भारत सरकार, प्रवर्तन निदेशालय और रिजर्व बैंक के नाम से फर्जी रसीदें भी भेजीं, ताकि दंपति को लंबे समय तक यह विश्वास रहे कि कार्रवाई किसी सरकारी प्रक्रिया के तहत हो रही है।
13 दिन तक निगरानी में रखा
पुलिस के मुताबिक रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी आरोपी करीब 13 दिन तक दंपति के संपर्क में रहे। लगातार धमकियां दी गईं और वाट्सऐप पर हुई बातचीत डिलीट करने के लिए भी दबाव बनाया गया। बाद में दंपति को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
ठगी की रकम वाला खाता कराया सीज
एडिशनल एसपी आयुष जाखड़ ने बताया कि शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम जिस खाते में पहुंची थी, उसे सीज कराने की कार्रवाई की है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन लेन-देन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही साइबर ठगी में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।








