
जबलपुर यश भारत ।शहर के व्यस्ततम और घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित आनंद टॉकीज के ध्वस्तीकरण कार्य ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। नगर निगम द्वारा किए जा रहे इस कार्य में अत्यंत भारी और तीव्र कंपन उत्पन्न करने वाले हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर का उपयोग किया जा रहा है, जो सामान्य निर्माण तोड़फोड़ की तुलना में कई गुना अधिक कंपन और ध्वनि उत्पन्न करता है।
मानव जनित ‘भूकंप’ जैसी स्थिति
आनंद टॉकीज के आसपास बसे नागरिकों का कहना है कि जबसे यह तोड़फोड़ शुरू हुई है, उनके घरों की दीवारें लगातार कंपकंपा रही हैं, खिड़की-दरवाजों में आवाजें आ रही हैं और कई जगहों पर सूक्ष्म दरारें भी देखी जा रही हैं। कुछ बुजुर्गों और महिलाओं ने तो इसे “भूकंप जैसा अनुभव” बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर से प्रति मिनट हजारों बार की जाने वाली चोट से 30 से 80 Hz की आवृत्ति पर कंपन उत्पन्न होता है, जो कमजोर संरचनाओं में दरारें पैदा कर सकता है, खासकर जब आस-पास की बिल्डिंगें पुरानी और जर्जर स्थिति में हों।
प्रशासन ने नहीं की कंपन-विश्लेषण की जांच
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे विध्वंस कार्य के दौरान नगर निगम या संबंधित तकनीकी विभाग द्वारा कोई ‘स्ट्रक्चरल इम्पैक्ट असेसमेंट’ (Structural Impact Assessment) नहीं कराया गया। न ही किसी वाइब्रेशन मीटर या सेइस्मिक सेंसर का उपयोग किया जा रहा है जिससे यह पता चल सके कि रॉक ब्रेकर से उत्पन्न कंपन की तीव्रता आसपास की संरचनाओं पर कितना प्रभाव डाल रही है।

ना हेल्थ सेफ्टी, ना एहतियाती उपाय
स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो आसपास की आबादी को इस कार्य से पूर्व कोई सूचना दी गई, न ही किसी तरह की ध्वनि और धूल नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। ऐसे में न केवल संरचनात्मक नुकसान बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं।अत्यधिक धूल और ध्वनि प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों को सांस संबंधी तकलीफें हो रही हैं, लेकिन इस ओर किसी भी विभाग ने ध्यान नहीं दिया है।








