आदमपुर खंती केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त: देश भर के मुख्य सचिवों को तलब किया

आदमपुर खंती केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त: देश भर के मुख्य सचिवों को तलब किया
कचरे पर लापरवाही पड़ी तो सीधे कलेक्टर करेंगे कार्रवाई
भोपाल, यशभारत। देश में कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। भोपाल की आदमपुर छावनी (खंती) में बार-बार लगने वाली आग के मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अब यह समस्या केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे पावर दी जाएगी और मौके पर ही कार्रवाई के लिए मोबाइल कोर्ट तैनात किए जाएंगे।
कलेक्टरों को मिलेगी सुपर पावर, निगमों की जवाबदेही तय
पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस की बेंच ने कहा कि नियमों का पालन न होना स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में सबसे बड़ी बाधा है। कोर्ट ने योजना बनाई है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगमों से अधिकार लेकर एक साल के लिए कलेक्टरों को सौंप दिए जाएं। इससे कचरा प्रबंधन से जुड़े फैसलों और कार्रवाई में तेजी आएगी।
22 मई तक सभी राज्यों से मांगा रोडमैप
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया था। कोर्ट ने सभी राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 22 मई तक अगली सुनवाई में कचरा छंटाई, प्रोसेसिंग, पेनाल्टी और मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों के मुख्य सचिवों ने कोर्ट के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी अब और सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती।
आदमपुर खंती से शुरू हुई देशव्यापी मुहिम
यह पूरा मामला भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में लगने वाली आग के बाद एनजीटी द्वारा भोपाल नगर निगम पर लगाए गए 1.80 करोड़ के जुर्माने से शुरू हुआ था। नगर निगम ने इस जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह केवल भोपाल या इंदौर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश का संकट है।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया कि देश में हर दिन लगभग 1.70 लाख टन कचरा पैदा होता है। कलेक्शन तो सुधरा है, लेकिन प्रोसेसिंग की रफ्तार बेहद धीमी है। बिना प्रोसेस किया गया कचरा साइंटिफिक लैंडफिल के बजाय पुराने डंपसाइट्स में डाला जा रहा है, जो हवा और भूजल को जहरीला बना रहा है।
जनप्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने केवल अफसरों ही नहीं, बल्कि पार्षदों, मेयर और वार्ड सदस्यों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने की हिदायत दी है। कोर्ट ने कहा कि नियम आसान हैं, बस स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को थोड़ी सक्रियता दिखानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण मिल सके।







