
साहब मैं जिंदा हूं, मृत घोषित महिला पहुंची कलेक्टर कार्यालय
गजब हैं, जिंदा महिला को कागज़ों में मृत घोषित कर दिया
Reporter, Akash pandey। मध्य प्रदेश:के दमोह में जब एक बुजुर्ग महिला बोली साहब, तुम तो जिंदा हो, फिर मैं क्यों मर गई? यह सवाल था एक बुजुर्ग महिला का, जिसकी आंखों में सरकारी सिस्टम की बेरुखी और एक साल की लंबी लड़ाई की थकान साफ झलक रही थी। दमोह जनपद पंचायत के बिलाई गाँव की दीपरानी पटेल, सरकारी कागजों में तो दुनिया छोड़ चुकी थीं, लेकिन असल में वे ज़िंदा खड़ी थीं।

यह कहानी है उस सरकारी लापरवाही की, जिसने एक ज़िंदा इंसान को कागज़ों में मार डाला। एक साल पहले दीपरानी को मृत घोषित कर दिया गया और उन्हें मिलने वाली सभी सरकारी योजनाएं और सुविधाएं अचानक बंद हो गईं।
एक साल तक दीपरानी हर सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाती रहीं, अपनी ज़िंदगी का सबूत देती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। उनकी गुहार सरकारी फाइलों में दबकर रह गई, और वे अपने ही अस्तित्व के लिए दर-दर भटकती रहीं।

मुश्किलें लाख आईं पर उम्मीद न हारी… लड़ती रही वो, अपनी पहचान में
आखिरकार, जब सब उम्मीदें टूट गईं, तो वह सीधे कलेक्टर सुधीर कोचर के पास पहुंचीं। जब उन्होंने कलेक्टर के सामने खड़े होकर कहा, साहब, देख लो, जांच लो, मैं ज़िंदा हूँ, तो कलेक्टर भी सन्न रह गए।
कलेक्टर ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने सम्मान के साथ महिला को बैठाया और तत्काल ही रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आदेश दिया। साथ ही, उन्होंने दोषी पंचायत सचिव को निलंबित करने और उस पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

इस घटना से यह साफ हो गया कि सरकारी कर्मचारी की छोटी सी लापरवाही किसी के जीवन में कितना बड़ा तूफान ला सकती है। लेकिन इस कहानी ने यह भी सिखाया कि अगर उम्मीद और हिम्मत हो तो, कोई भी लड़ाई जीती जा सकती है। कलेक्टर के सख्त कदम से यह उम्मीद जगी है कि अब ऐसी लापरवाही करने वालों के खिलाफ जल्द और सख्त कार्रवाई होगी।







