प्रदेश में कड़ाके की ठंड का कहर, भोपाल सबसे ठंडे शहरों में शामिल

प्रदेश में कड़ाके की ठंड का कहर, भोपाल सबसे ठंडे शहरों में शामिल
– भोपाल का न्यूनतम 5.2 डिग्री सेल्सियस पहुंचा, 84 साल पुराने रिकॉर्ड के करीब
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। रात और दिन दोनों का तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर गया है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल अब देश के 10 सबसे ठंडे शहरों में शामिल हो गया है। यहां न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल का तापमान 84 साल पुराने रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गया है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड 30 नवंबर 1941 में 6.1 डिग्री का था।
शहर में सुबह से ही लोग गर्म कपड़ों में सर्दी का सामना करते नजर आए। हल्की धूप के बावजूद ठंड का असर बरकरार रहा। राजधानी में खासकर बुजुर्ग और छोटे बच्चे ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि पिछले कई दशकों में इतनी कड़ाके की ठंड पहले कभी नहीं देखी गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर की शुरुआत में लगातार शीतलहर और आर्द्र हवा के प्रभाव से तापमान में गिरावट आई है। इन दिनों दिन के तापमान में भी कमी देखने को मिल रही है, जिससे लोगों को दिनभर गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिन भी ठंड का असर जारी रहेगा।
भोपाल, इंदौर और राजगढ़ के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी ठंड का असर महसूस किया जा रहा है। राजगढ़ की गलियों और भोपाल के खुले इलाकों में ठंडी हवाओं ने राहगीरों और वाहन चालकों को परेशान किया। लोग सुबह के समय विशेष सावधानी बरत रहे हैं और स्कूल जाने वाले बच्चे गर्म कपड़ों और स्वेटर पहनकर निकल रहे हैं। मौसम विभाग ने शीतलहर के दौरान सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने लोगों से कहा है कि वे सर्दी में गले, सिर और पैरों को गर्म रखें और विशेष रूप से बुजुर्ग और बच्चों की देखभाल करें।
राज्य के कई जिलों में शीतलहर का असर
राज्य के कई जिलों में दो दिनों तक शीतलहर के आसार हैं। तापमान में गिरावट की वजह से अभिभावक बार-बार स्कूल समय में परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे बच्चों के लिए इतनी सुबह उठकर ठिठुरन में स्कूल जाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके बावजूद भोपाल में नर्सरी से लेकर उच्च कक्षाओं तक के स्कूल पुराने समय अनुसार ही संचालित हो रहे हैं।
छिंदवाड़ा व देवास के स्कूलों में बदला स्कूल का टाइम
इसके उलट प्रदेश के कुछ जिलों ने समय पर ठंड को देखते हुए स्कूलों के समय में जरूरी बदलाव किए हैं। ग्वालियर में 1 नवंबर से कई स्कूलों ने अपनी टाइमिंग सुबह 8 बजे के बाद कर दी है। वहीं छिंदवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि जिले में सुबह 8.30 बजे से पहले कोई भी स्कूल नहीं खुलेगा। इसी तरह देवास जिले में भी लगातार गिरते तापमान के बीच कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने स्कूलों के समय में परिवर्तन का आदेश जारी किया है। नए नियम के अनुसार नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सभी स्कूल अब सुबह 10 बजे के बाद ही खुलेंगे। प्रशासन का कहना है कि इससे बच्चों को ठंड के प्रभाव से बचाया जा सकेगा।







