जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

रानीदुर्गावती एल्गिन अस्पतालः रात में सिर्फ एक डॉक्टर फिर भी मरीजों ने कहा बेहतर इलाज मिल रहा है

यशभारत आंखांे-देखी, सवाल पूछने पर झल्लागई लेडी डॉक्टर, कुछ भी बताने से किया इंकार

 

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जबलपुर, यशभारत। संभाग के सबसे बड़े रानी दुर्गावती एल्गिन अस्पताल की व्यवस्थाओं का उदाहरण देकर अन्य सरकारी अस्पतालों को ठीक करने को कहा जाता है। कुछ हद तक ये सही भी है। लेकिन यशभारत की टीम ने रात 10 बजे से लेकर 11 बजे तक अस्पताल का मुआयना किया तो व्यवस्थाएं तो ठीक-ठाक नजर आई परंतु डॉक्टरों की मौजदूगी बहुत कम थी। इस बारे में जब ड्यूटी डॉक्टर से पूछताछ की गई तो झल्ला गई उनका कहना था कि कोई भी जानकारी चाहिए हैं तो उन्हें सुबह तक का इंतजार करना होगा। पर टीम के पास इतना वक्त नहीं था कि वह सुबह तक इंतजार करें। आगे बढ़े तो देखें उपर के वार्डों में सिर्फ महिला मरीज और बच्चे भर्ती थे, वहां कोई डॉक्टर नहीं था। मरीजों से पूछा तो उनका कहना था कि डॉक्टर रात में एक ही रहता है वो कभी भी पूरे वक्त नजर नहीं आते हैं, परंतु दिन में इलाज बहुत बढ़िया मिल रहा है।

विंडो कूलर सजकर तैयार पर चालू अभी तक नहीं हुए

एल्गिन अस्पताल के सभी वार्डोें की खिड़कियों में विंडो कूलर लगे हुए हैं, उनका मेंटनेंस भी हो चुका है लेकिन जानकर हैरानी होगी अभी तक एक भी कूलर चालू नहीं किया गया है। एक वार्ड में मौजूद स्टाफ नर्स से पूछा गया तो उनका कहना था कूलर हर चालू होते हैं परंतु अभी तक इतनी गर्मी होने के बाबजूद मेंटनेंस विभाग ने कूूलरों को चालू नहीं किया है।

वाटर फिल्टर से गर्म पानी

उपरी वार्ड में लगे एक वाटर कूलर को चलाकर देखा गया तो उसमें गर्मी निकल रहा था जबकि प्रसूता को कुछ देर ठहराने वाले वार्ड में लगे वाटर फिल्टर से ठंडा पानी आ रहा था। मरीजों से पूछा गया तो उनका कहना था कि वाटर फिल्टर सिर्फ नाम का है इसका पानी का स्वाद भी ठीक नहीं है और पानी भी गरम आता है।

डॉक्टरों से ज्यादा मुस्तैद तो महिला गार्ड

रानीदुर्गावती एल्गिन अस्पताल में डॉक्टर भले ही अपने काम में लापरवाही करें परंतु वहां मौजूद महिला सुरक्षा कर्मी पूरी ईमानदारी से अपना काम करते हुए नजर आई। मुख्य गेट से लेकर वार्ड के अंदर तक सिर्फ उन्हीें व्यक्तियों को प्रवेश दिया जा रहा था जो मरीज के परिजन थे वो भी महिला परिजनों को।

मरीज ज्यादा, डॉक्टर कम है

लेडी एल्गिन अस्पताल में 150 से 200 मरीजों को भर्ती किया जा सकता है परंतु इनके हिसाब से डॉक्टरों की कमी है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक वार्ड में एक से दो डॉक्टर होना चाहिए परंतु एल्गिन में रात के समय सिर्फ मुश्किल एक डॉक्टर ही मौजूद रहता है और इसी डॉक्टर को लगातार दो दिन तक ड्यूटी करना पड़ जाता है।

डॉक्टरों की कमी के बाबजूद बेहतर इलाज

सबसे गौर करने वाली बात यह है कि एल्गिन अस्पताल में डॉक्टरों की भले कमी है परंतु महिला मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों से पूछा गया तो उनका यही कहना था बेहतर इलाज मिल रहा है, कोई कमी नहीं है, डॉक्टर से ज्यादा स्टाफ नर्स ध्यान रखती है।

हर माह होती है करीब 1200 महिलाओ की डिलीवरी

रानी दुर्गावती लेडी एल्गिन अस्पताल जबलपुर संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है इस अस्पताल में हर माह करीब 1200 महिलाओं की डिलीवरी होती है। कभी-कभी तो यह आंकड़ा 1500 के पार पहुंच जाता है। कोरोना संक्रमण काल मे एल्गिन अस्पताल में महिलाओ के डिलीवरी की संख्या भी बढ़ गई है। जिसकी मूख्य वजह यह है कि कोविड के इस समय मे कुछ अस्प्ताल ही डिलीवरी संबंधित सुविधा दे रहे है और उनके चार्ज बहुत ज्यादा है, चलते महिलाओं की डिलीवरी की संख्या सरकारी अस्पताल में बढ़ गई है।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन’ स्लोेगन के तहत इलाज

लेडी एल्गिन रानी दुर्गावती अस्पताल में लिखा ये स्लोगन ‘सुरक्षित मातृत्व आश्वासन’ इस हॉस्पिटल की जिम्मेदारी और बढ़ा रहा है। इस अस्प्ताल में रोजाना 30 से 40 प्रसव हो रहे हैं। खास बात ये है कि लेडी एल्गिन अस्प्ताल में महिलाओ को वो सुविधा मिल रही है जो कि निजी अस्पताल में हजारों रुपए खर्च करने के बाद मिलती है। लेडी एल्गिन अस्पताल में कोशिश की जाती है कि महिलाओ की नार्मल डिलीवरी हो और ईलाज के दौरान जच्चा-बच्चा दोनो सुरक्षित रहे।

इनका कहना है
डॉक्टरों की कमी बनी हुई, लेकिन एल्गिन अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। इस बारे में स्टाफ को बार-बार निर्देश दिए जाते हैं। कुछ कमियां जिसे दूर करना है बहुत जल्द उन कमियों को दूर किया जाएगा।
डॉक्टर संजय मिश्रा, संचालक क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाएं

Yash Bharat

Editor With मीडिया के क्षेत्र में करीब 5 साल का अनुभव प्राप्त है। Yash Bharat न्यूज पेपर से करियर की शुरुआत की, जहां 1 साल कंटेंट राइटिंग और पेज डिजाइनिंग पर काम किया। यहां बिजनेस, ऑटो, नेशनल और इंटरटेनमेंट की खबरों पर काम कर रहे हैं।

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