खितौला बैंक डकैती मामले से उपजे सवाल पुलिस की कार्य प्रणाली भी सवालों के घेरे में

जबलपुर यश भारत। सोमवार की सुबह-सुबह खितौला थाना क्षेत्र में हुई डकैती की घटना मैं कई सवाल भी पैदा कर दिए हैं। घटना के बाद न केवल खितौला पुलिस बल्कि पूरा सिहोरा अनुभाग की कार्यप्रणाली ही सवालों की घेरे में आ गई है। जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया उससे साफ झलकता है कि यह पूरी घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई है। हालांकि पुलिस घटना के बाद अब सीसीटीवी कैमरा फुटेज की मदद से आरोपियों तक पहुंचाने की कवायद में लग गई है। पुलिस की कई टीम में किस काम में लगाई गई है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि घटना में कहीं कोई बैंक कर्मचारी की भूमिका तो नहीं है। खितौला के इसाफ माइक्रो फाइनेंस बैंक में 15 करोड़ की डकैती की घटना ने न केवल सिहोरा खितोला बल्कि पूरे जिले में सनसनी मचा दी है।
हाल ही में ज्वालामुखी मंदिर में सामने आई थी चोरी की घटना
गौरतलब है कि हाल ही में सिहोरा की प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर में भी अज्ञात चोरो के द्वारा चूड़ी की घटना को अंजाम दिया गया था। इसके अलावा गंजताल निवासी एक व्यक्ति के साथ भी चाकू की नोक पर लूट की घटना को समय अंजाम दिया गया जब वह किसी चौक समारोह मै शामिल होकर वापस लौट रहा था।
घटना में कहीं पारधी गिरोह का हाथ तो नहीं
सूत्रों की मांने तो सिहोरा पुलिस अनुभाग से लेकर सलीमनाबाद तक पूर्व में लूट की कई घटनाएं सामने आ चुकी है। करीब दो माह पूर्व जब उत्तर प्रदेश के एक भाजपा नेता के साथ लूटपाट की घटना सामने आई थी तो काफी हो हल्ला मचा था हालांकि बाद में उक्त घटना में पर भी गिरोह के कुछ सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। अब जबकि खितौला के इसाफ माइक्रो फाइनेंस बैंक में 15 करोड़ की डकैती की यह सनसनीखेज वारदात सामने आई है तो एक बार फिर यह सवाल पूछने लगा है कि कहीं इस घटना में भी तो पर भी गिरोह की कोई भूमिका नहीं है। सूत्रों के अनुसार जबलपुर से कटनी की ओर जाने वाले हाईवे पर पूर्व में लूट की कई घटनाएं घटित हो चुकी हैं। जानकारी तो यहां तक है कि पारधी गिरोह के सदस्यों ने सिहोरा के आसपास और स्लीमनाबाद के बीच में अपना डेरा जमा रखा है। और पारधी गिरोह की संलिप्तता पूर्व की कई घटनाओं में सामने आ चुकी है।
हाईवे के ज्यादातर ढाबों में नहीं है सीसीटीवी कैमरे
कहने को तो सिहोरा और स्लीमनाबाद के बीच में कई ढाबे हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर ढाबो में सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण भी लूट जैसी घटनाएं होने के बाद भी आरोपी आसानी से बच निकलते हैं। इतना नहीं ज्यादातर ढाबो मैं शराबखोरी भी आम बात है जहां पर संदिग्ध तत्व हिंदी रात तक शराबखोरी करने के बाद एक तरह की घटनाओं को अंजाम देने से भी नहीं चूकते।
किसी भी घटना के बाद कुछ दिन दिखती है पुलिस की सतर्कता
जैसा कि आमतौर पर देखा जाता है कि जब कोई बड़ी घटना घटित हो जाती है तो पूरा पुलिस महकमा एक्टिव मोड पर आ जाता है लेकिन समय बीतने के साथ ही उनकी सक्रियता फिर गायब हो जाती है और सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है। कहीं ना कहीं घटनाओं के लिए पुलिस की लापरवाह कार्य प्रणाली को भी जिम्मेदार ठहराना अतिशयोक्ति नहीं होगी।







