अंबेडकर सेतु की मरम्मत का खर्च ठेकेदार से वसूलेगा पीडब्लूडी – 4.69 करोड़ की निविदा, लागत के साथ 20% क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी

अंबेडकर सेतु की मरम्मत का खर्च ठेकेदार से वसूलेगा पीडब्लूडी
– 4.69 करोड़ की निविदा, लागत के साथ 20% क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी
– ब्लैकलिस्टिंग का नोटिस, हाईकोर्ट ने खामियां दूर करने के दिए निर्देश
भोपाल, यश भारत । एमपी नगर में गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक बने अंबेडकर सेतु (जीजी ओवरफ्लाई) की खराबी को लेकर लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्लाईओवर की मरम्मत और संधारण पर आने वाला पूरा खर्च संबंधित ठेकेदार संस्था मेसर्स वीकेएससी इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड से वसूला जाएगा। अनुबंध के तहत मरम्मत की वास्तविक लागत के साथ 20 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि भी ठेकेदार से ली जाएगी। इससे विभाग पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
पांच साल की डीएलपी में सामने आईं खामियां
अंबेडकर सेतु का निर्माण 31 दिसंबर 2024 को पूरा हुआ था और इसकी दोष दायित्व अवधि 30 दिसंबर 2029 तक है। इस अवधि में निर्माण या संधारण से जुड़ी कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। फ्लाईओवर के बियरिंग कोट में पहले भी खराबी सामने आई थी, जिसे ठेकेदार ने सुधारा था। इस वर्ष बारिश के दौरान यह समस्या दोबारा सामने आई।
निरीक्षण में ड्रेनेज स्पाउट और रेनवॉटर डाउनटेक पाइप चोक व क्षतिग्रस्त मिले। इससे बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हुई और कुछ स्थानों पर पानी सीधे सड़क पर गिरता पाया गया। एक्सपेंशन जॉइंट से पानी का रिसाव, सर्विस रोड पर जलभराव, गड्ढे और पानी रुकने जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
15 दिन में सुधार के निर्देश, नहीं हुआ काम
पीडब्लूडी ने 31 जुलाई और 11 अगस्त 2026 को ठेकेदार को सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए थे। अनुबंध के मुताबिक 15 दिन में सुधार कार्य पूरा किया जाना था, लेकिन तय अवधि में काम पूरा नहीं हुआ। इसके बाद विभाग ने अनुबंध की शर्तों के तहत अपने स्तर पर सुधार कार्य कराने की प्रक्रिया शुरू की और इसके लिए 4.69 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की।
विभाग के पास डीएलपी अवधि में ठेकेदार की परफॉर्मेंस गारंटी की बैंक गारंटी जमा रहती है। नियमों के अनुसार इसी गारंटी को जब्त कर संधारण कार्य की राशि की भरपाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
ठेकेदार संस्था ने कुछ आंशिक सुधार कराने के साथ विभाग की नई निविदा प्रक्रिया के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने फिलहाल नई निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए ठेकेदार को फ्लाईओवर की सभी खामियां दूर करने और किए गए सुधार कार्यों का पालन प्रतिवेदन अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
संधारण कार्य में लापरवाही को लेकर विभाग ने 11 अगस्त को ठेकेदार संस्था को ब्लैकलिस्ट करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। संस्था के जवाब का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है।







