छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य पदार्थों में चीनी मिलाने पर रोक का प्रस्ताव
एफएसएसएआई ने नियमों में संशोधन का मसौदा किया जारी, 60 दिनों में मांगे सुझाव और आपत्तियां

नई दिल्ली। शिशुओं के पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसके तहत छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। यह मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य शिशुओं की उम्र के अनुरूप पोषण सुनिश्चित करना और शुरुआती जीवन में अतिरिक्त चीनी के सेवन को कम करना है। वर्तमान नियमों में शिशु पोषण उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और पोषण संरचना के मानक निर्धारित हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। सुक्रोज और फ्रुक्टोज के इस्तेमाल की अनुमति निर्धारित शर्तों और सीमाओं के तहत है।
नए मसौदे में छह महीने तक के शिशुओं के उत्पादों में इन दोनों प्रकार की शर्करा को मिलाने पर विशेष प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य शिशुओं की जरूरतों के अनुसार पोषण उपलब्ध कराना और अनावश्यक अतिरिक्त चीनी से बचाव करना है। इससे बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के प्रयासों को भी समर्थन मिल सकता है।
यह पहल जीवन के पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान को प्रोत्साहित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सिफारिशों के अनुरूप है।एफएसएसएआई ने मसौदे पर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव दिए जा सकेंगे। सभी प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा। फिलहाल यह प्रस्तावित नियम है, अंतिम रूप से लागू प्रावधान नहीं।







