नियमों को ताक पर रखकर ब्लैक मार्केट में बिक रहे पाइप बम
125 डेसीबल तक धमाकों से दहलेगी शहर की आबादी

जबलपुर, यशभारत। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही शहर में पटाखों की दुकानें सज गई हैं। बाजार में आतिशबाजी की तमाम वैरायटी के बीच सबसे बड़ा खतरा उन पाइप बमों से है, जिनकी न तो कोई ब्रांडिंग होती है और न ही निर्माण करने वाली कंपनी का स्पष्ट नाम। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले ये पाइप बम खुले बाजार में सामने से बेचने के बजाय कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में मांग के आधार पर बेचे जा रहे हैं। तेज धमाकों और अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के लिए कुख्यात इन बमों की बिरी पर अंकुश लगाना
जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
दरअसल, चाइना पटाखों पर प्रतिबंध के बाद भी तेज आवाज वाले पटाखों का कारोबार थमा नहीं है। शिवाकाशी से आने वाले पटाखों के अलावा स्थानीय आतिशबाज भी सुतली बम, एटम बम और विशेष रूप से पाइप बम तैयार कर रहे हैं। इनमें पाइप बम सबसे ज्यादा चिंता का विषय हैं। इनका निर्माण स्थानीय स्तर पर होने के कारण
किसी स्थापित ब्रांड का नाम या निर्माता की पहचान सामने नहीं आती। यही वजह है कि इनके
निर्माण, भंडारण और बिक्री पर कार्रवाई करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
दुकानों पर नहीं दिखेंगे, मांगने पर होगी सप्लाई
पाइप बमों का कारोबार करने वालों ने कथित तौर पर बिक्री का तरीका भी बदल लिया है। दुकानों के सामने इन्हें खुलेआम प्रदर्शित करने या बेचने के बजाय अलग से मांग करने वालों को उपलब्ध कराया जा रहा है। यानी बाजार में पटाखों की दुकानों पर भले ही इनकी मौजूदगी नजर न आए, लेकिन पर्दे के पीछे इनका कारोबार जारी रहने की शिकायतें हैं। ऐसे में प्रशासन की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का असर वास्तविक बिक्री तक पहुंच पाएगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
125 डेसीबल तक धमाके आम लोगों की परेशानी
तेज आवाज वाले पटाखों से होने वाले धमाके रहवासी इलाकों में बुजुगों, छोटे बच्चों, बीमार व्यक्तियों और हृदय रोगियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। 125 डेसीबल तक की आवाज
वाले पटाखों को लेकर ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों और न्यायालयीन निर्देशों के तहत प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू हैं। इसके बावजूद हर साल दीपावली पर कानफोडू धमाकों की शिकायतें सामने आती हैं। पाइप बमों से होने वाला तेज धमाका ध्वनि प्रदूषण के साथ लोगों में घबराहट और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है। स्थानीय निर्माण पर कार्रवाई कौन करेगा? सबसे अहम सवाल स्थानीय स्तर पर हो रहे निर्माण को लेकर है। जब किसी पटाखे पर निर्माता
समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगी मुश्किल
का नाम, ब्रांड या वैधानिक पहचान ही नहीं होगी, तो उसकी सप्लाई चेन तक पहुंचना आसान नहीं होगा। प्रशासन को केवल लाइसेंसधारी दुकानों की जांच तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय निर्माण स्थलों, अवैध भंडारण और पर्दे के पीछे चल रहे कारोबार पर भी निगरानी रखनी होगी। अन्यथा प्रतिबंधात्मक आदेश कागजों तक सीमित रह जाएंगे और दीपावली की रात शहर के रहवासी इलाकों में तेज धमाकों का सिलसिला जारी रहेगा।
पटाखों की खेप बाजार में पहुंचने के बाद ऐन वक्त पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना कितना प्रभावी होगा, यह भी विचारणीय है। प्रशासन को पहले से ही ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने वाले पटाखों की पहचान, स्थानीय निर्माताओं की जांच और अवैध बिक्री पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभाग पाइप बमों के इस कथित ब्लैक मार्केट पर कितना अंकुश लगा पाते हैं या फिर इस बार भी आम नागरिकों को कानपफेडू धमाकों के बीच दीपावली मनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।







