घोषणाएं फुल स्पीड में, रिमॉडलिंग काम सिग्नल पर खड़ा,तीन साल से टेंडर पर टंगा जबलपुर रेलवे स्टेशन
एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमती रहीं फाईलें

जबलपुर यशभारत। देशभर के रेलवे स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास बनाने के दावों के बीच पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर रेलवे स्टेशन तीन साल से टेंडर प्रक्रिया में ही अटका पड़ा है। अधिकारियों की उदासीनता और फाइलों में उलझी योजनाओं ने रिमॉडलिंग कार्य को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। यात्रियों को आज भी बदहाल सुविधाओं और अव्यवस्थाओं के बीच सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर रेलवे स्टेशन की बहुप्रतीक्षित रीमॉडलिंग योजना पिछले तीन वर्षों से टेंडर प्रक्रिया में ही उलझकर रह गई है। इस संबंध में रेलवे सूत्रों के मुताबिक 250 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर रेलवे प्रशासन लगातार बड़े-बड़े दावे करता रहा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक कार्य शुरू होना तो दूर, अंतिम टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली और आपसी समन्वय की कमी के चलते स्टेशन का आधुनिकीकरण अधर में लटक गया है।
एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमती रहीं फाईलें
रेलवे सूत्रों के अनुसार स्टेशन रीमॉडलिंग के तहत प्लेटफॉर्म विस्तार, फुट ओवर ब्रिज आधुनिक वेटिंग हॉल, यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी, पार्किंग व्यवस्था और स्टेशन परिसर को विश्वस्तरीय स्वरूप देने की योजना तैयार की गई थी। लेकिन फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमती रहीं और जिम्मेदार अधिकारी केवल बैठकें व निरीक्षण तक सीमित रहे।
यात्री संख्या बढ़ी लेकिन व्यवस्थाएं पुरानी
स्टेशन पर बढ़ती यात्री संख्या के बावजूद व्यवस्थाएं वर्षों पुरानी हैं। कई प्लेटफॉर्मों पर अव्यवस्था का आलम बना हुआ है, जबकि रेलवे लगातार जबलपुर स्टेशन को महत्वपूर्ण जंक्शन बताकर प्रचार करता रहा है।
धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा काम
यात्रियों का आरोप है कि रेलवे केवल घोषणाएं कर रहा है, जबकि धरातल पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा। तीन साल से टेंडर प्रक्रिया लंबित रहना रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि रेलवे अधिकारी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कब तक कागजों से बाहर निकाल पाते हैं, या फिर जबलपुर स्टेशन का रीमॉडलिंग सपना यूं ही फाइलों में दम तोड़ता रहेगा।







