भोपाल में मठ के पते पर बने 40 से अधिक फर्जी पासपोर्ट, पुलिस सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल में मठ के पते पर बने 40 से अधिक फर्जी पासपोर्ट, पुलिस सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल
भोपाल, यसभारत। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाये जाने के बहुचर्चित मामले की जांच अब डबरा से राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि भोपाल के गोविंदपुरा स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ के पते का इस्तेमाल कर 40 से अधिक पासपोर्ट जारी कराए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में एक ही पते पर पासपोर्ट बनने के बाद अब पुलिस सत्यापन प्रक्रिया और विभागीय भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
दूसरी ओर, एसटीएफ के दावों के बीच मठ का पक्ष अलग ही नजर आ रहा है। संवाददाताओं से बातचीत में मठ के भंते कश्यप आनंद ने मामले की किसी भी जानकारी से साफ इनकार किया है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले भंते कश्यप आनंद ने बताया कि वे दो दिन पहले ही मठ आए हैं। उनके मुताबिक, न तो एसटीएफ की टीम ने उनसे कोई संपर्क किया है और न ही पहले कभी पुलिस सत्यापन के लिए मठ आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके बाहर रहने के दौरान यदि कोई आया हो तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
एसटीएफ की अब तक की कार्रवाई में फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण-पत्र और 10वीं की अंकसूची के सहारे पासपोर्ट बनवाने का नेटवर्क उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बौद्ध पहचान अपनाकर भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए। इस मामले में एसटीएफ ने रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। रियाल चौधरी खुद कई पासपोर्ट आवेदनों में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार अलग-अलग पासपोर्ट पाए गए हैं।
इस गिरोह के तार असम समेत देश के अन्य राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसके आधार पर एसटीएफ इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और मानव तस्करी या घुसपैठ जैसे कोणों से भी जांच कर रही है। एसटीएफ का कहना है कि पूरे प्रदेश में करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 22 की पुष्टि हो चुकी है। फिलहाल एजेंसी पासपोर्ट आवेदन से लेकर पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी श्रृंखला की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि सत्यापन में लापरवाही हुई है या मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखा गया।







