मुंबई के इस मैदान में दिवाली पर तोप से उड़ा दिए गए थे भारतीय सैनिक

मुंबई, यश भारत देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के इतिहास में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा एक ऐसा क्रूर अध्याय दर्ज है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। अंग्रेजों ने दिवाली के दिन दो भारतीय सैनिकों को तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया था। यह घटना 15 अक्टूबर 1857 की है।मुंबई के एस्प्लेनेड मैदान में 15 अक्टूबर 1857 को हुई इस घटना में मरीन बटालियन के ड्रिल हवलदार सैयद हुसैन और 10वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल गुदरिया को अंग्रेजों ने मौत की सजा सुनाई थी। दोनों पर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह की साजिश रचने का आरोप था।
मुंबई के तत्कालीन पुलिस प्रमुख चार्ल्स फोर्जेट ने भेष बदलकर सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखी थी। उन्हें धोबी तलाव के सोनापुर इलाके में गंगा प्रसाद के घर सैनिकों की गुप्त बैठक की जानकारी मिली। आरोप था कि सैनिकों ने दिवाली के दौरान मुंबई में हमला कर पुणे की ओर कूच करने और नाना साहेब को दक्कन का पेशवा घोषित करने की योजना बनाई थी।13 अक्टूबर को सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया गया। दो सैनिकों को मृत्युदंड और छह को आजीवन देश निकाला दिया गया। 15 अक्टूबर को भारी सुरक्षा के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी में दोनों सैनिकों को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया गया।






