सिर्फ शराब नहीं, भोजन और मोटापा भी बन रहा लिवर सिरोसिस की बड़ी वजह
फेटी लिवर होते ही सतर्क रहें तो सिरोसिस से बच जायेंगे मरीज

‘यश भारत प्राइम टाइम’ विथ आशीष शुक्ला में गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. मनीष तिवारी से खास बातचीत
जबलपुर, यशभारत । ‘यश भारत प्राइम टाइम’ विथ आशीष शुक्ला में गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. मनीष तिवारी ने लिवर सिरोसिस को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आम धारणा के विपरीत लिवर सिरोसिस केवल शराब पीने से ही नहीं होता, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और बदलती जीवनशैली भी इसके प्रमुख कारण हैं। डॉ. तिवारी ने बताया कि फैटी लिवर को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यही आगे चलकर सिरोसिस में बदल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह एक ‘साइलेंट किलर’ है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते। उन्होंने लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह देते हुए कहा कि ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी और फाइब्रोस्कैन के जरिए समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
खासतौर पर 30 35 वर्ष की उम्र के बाद, मोटापे या अन्य जोखिम कारकों वाले लोगों को नियमित रूप से लिवर की जांच करानी चाहिए। डॉ. तिवारी ने यह भी बताया कि हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरस भी लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इनकी जांच भी जरूरी है। महिलाओं और बच्चों में सिरोसिस के कारण अलग हो सकते हैं, जिनमें हार्मोनल बदलाव और अनुवांशिक बीमारियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए और कारणों का सही इलाज किया जाए, तो सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे लक्षणों का इंतजार न करें, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।







