जबलपुर

Municipal Corporation Jabalpur.सफाई का जिम्मा नहीं संभाल पा रही एस्सेल कंपनी: नगर निगम कमिश्रर

 

ठेका लेने के बाद दूसरे को दे रखी है डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी

नगर निगम की जांच में निगमायुक्त ने किया खुलासा

एस्सेल कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुटा नगर निगम

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का पांचवा दिन आज , वेतन को बनाया मुद्दा

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जबलपुर,यशभारत। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहित करने के मामले एक नया खुलासा हुआ है। एस्सेल कंपनी के पास वाहनों के साथ मैन पॉवर की कमी है जिसके चलते डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का कार्य वह नहीं कर पा रही है। जिसका खामियाजा शहरवासी भुगत रहे हैं। ये बात कहते हुए नगर निगम कमिश्रर प्रीति यादव ने यशभारत को बताया कि नगर निगम द्वारा की गई अभी तक की जांच में ये बात सामने आई है कि एस्सेल कंपनी ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का ठेका सब कॉन्ट्रेक्ट पर किसी और को देकर रखा है। ऐसे में नगर निगम द्वारा एस्सेल कंपनी के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारियां शुरू कर दीं गईं हैं। उधर नगर निगम जबलपुर द्वारा खुद के संसाधनों का उपयोग करते हुए सफाई व्यवस्था दुरूस्त करने प्रयास किए जा रहे हैं। गत दिवस भी निगम द्वारा 203 गाड़ियां भेजकर 450 ट्रिप लगवाकर घर-घर से कचरा संग्रहित कराया गया था। विदित हो कि पिछले 4 दिनों से कचरा कलेक्शन करने वाले वाहन चालकों ने हड़ताल कर दी है और रविवार को आज उनकी हड़ताल का पांचवा दिन है। जिससे शहर के अधिकांश इलाकों में कचरा संग्रहण का कार्य प्रभावित हुआ है।

एक महीने का वेतन बस हुआ है लेट: निगमायुक्त
सफाई कर्मचारियों के वेतन की बात पर नगर निगम कमिश्नर प्रीति यादव ने कहा है कि पहले नगर निगम द्वारा एस्सेल कंपनी को सभी कर्मचारियों का वेतन दिया जाता है और फिर एस्सेल कंपनी अपने हिसाब से उक्त राशि का वितरण करती है। अपनी कमियों को छिपाने के लिए वेतन को बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है। सफाई कर्मचारियों का सिर्फ एक माह का वेतन लेट हुआ है जो कि नगर निगम द्वारा सोमवार को क्लीयर हो जाएगा।

10 साल पहले दिया गया था ठेका
जानकारी के अनुसार डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का ठेका एस्सेल कंपनी को 10 साल पहले नगर निगम जबलपुर द्वारा दिया गया था जिसमें करीब 300 कचरा वाहन पूरे शहर में चलने थे। लेकिन अभी एस्सेल कंपनी के पास करीब 100 के आसपास वाहन हैं जिससे पूरे शहर में कचरा संग्रहित करना अब संभव नहीं हो पा रहा है।

कुछ इस प्रक्रिया के तहत होते हंै ठेका निरस्त
नगर निगम कमिश्रर प्रीति यादव ने यशभारत को बताया कि नोटिस देने के बाद करीब एक माह तक का समय संंबंधित ठेकेदार या ठेका कंपनी को दिया जाता है और इस टाइम पीरियड में उनके कार्य में सुधार हुआ है कि नहीं ये देखा जाता है। जिसके बाद ठेका निरस्त करने की कार्यवाही की जाती है। जानकारी के अनुसार निगमायुक्त ने एस्सेल कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है।

–नगर निगम के पास खुद के संसाधानों का उपयेाग करते हुए शहर में साफ-सफाई का कार्य निरंतर करवाया जा रहा है और एस्सेल कंपनी को नोटिस देते हुए अब उसके खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है। क्योंकि कंपनी के कारण ही शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
–प्रीति यादव, कमिश्नर नगर निगम।

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