सीएम सचिवालय में मेगा रीसेट तेज निर्णय और सख्त मॉनिटरिंग के लिए नया कार्यविभाजन

सीएम सचिवालय में मेगा रीसेट तेज निर्णय और सख्त मॉनिटरिंग के लिए नया कार्यविभाजन
भोपाल यश भारत। मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री सचिवालय में गुरुवार को बड़े स्तर पर प्रशासनिक कार्यविभाजन किया गया है। यह कदम सामान्य फेरबदल से अलग माना जा रहा है, जिसे प्रशासन को अधिक तेज जवाबदेह और परिणाम केंद्रित बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का स्पष्ट फोकस निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने, मॉनिटरिंग को मजबूत करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर है। रिजल्ट ओरिएंटेड गवर्नेंस की ओर कदम नए सिस्टम से संकेत मिलते हैं कि सरकार अब माइक्रो मैनेजमेंट और रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दे रही है। प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और समयबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचे। ग्रुप A से D तक जिम्मेदारियों का स्पष्ट खाका , कार्य विभाजन के तहत अधिकारियों को चार समूह A, B, C और D में बांटा गया है, जिससे हर स्तर पर जवाबदेही तय हो सके और फाइलों के निपटारे में तेजी आए। ग्रुप A एसीएस नीरज मंडलोई के पास केंद्रीय कमान , अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को सचिवालय की केंद्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके जिम्मे सीएमओ का समन्वय विभागीय फाइलों और प्रस्तावों की समीक्षा मंत्रियों एवं सांसदों से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग शीर्ष योजनाओं और सिंहस्थ 2028 की निगरानी जैसे अहम कार्य होंगे। इसके अलावा वे मुख्यमंत्री के दौरों का पर्यवेक्षण ए+ मॉनिटरिंग नोटशीट की समीक्षा सीएम से भेंट मुलाकात की व्यवस्था शीर्ष 20 प्राथमिक योजनाओं की समीक्षा और नीतिगत मामलों में निर्णय प्रक्रिया को दिशा देने की भूमिका निभाएंगे। सहयोगी टीम भी निर्धारित ,एसीएस मंडलोई के सहयोग के लिए अपर सचिव अरुण कुमार ओएसडी आलोक सोनी और कविराज मेहरा को जिम्मेदारी दी गई है। यह टीम इंदौर और उज्जैन संभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में भी समन्वय बनाएगी। मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग पर विशेष जोर,अपर सचिव अरविंद दुबे को कैबिनेट और विधानसभा कार्यों के साथ साथ बड़े प्रोजेक्ट्स की ट्रैकिंग मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा लंबित मामलों में ध्यानाकर्षण और उच्चस्तरीय बैठकों से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की पहल , नए कार्य विभाजन को शासन प्रशासन में पारदर्शिता गति और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी बल्कि योजनाओं के धरातल पर बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद भी बढ़ी है।






