भोपालमध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश कांग्रेस का तीन दिवसीय मौन सत्याग्रह: टीवी डिबेट और बयानों पर पूरी तरह रोक, मीडिया पर पक्षपात का आरोप

मध्यप्रदेश कांग्रेस का तीन दिवसीय मौन सत्याग्रह: टीवी डिबेट और बयानों पर पूरी तरह रोक, मीडिया पर पक्षपात का आरोप

भोपाल, यशभारत। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर मचे आंतरिक घमासान और विरोध के स्वरों के बीच प्रदेश संगठन ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने आज से आगामी तीन दिनों के लिए मौन सत्याग्रह की घोषणा की है। इस दौरान कांग्रेस के सभी प्रवक्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के टेलीविजन डिबेट में शामिल होने और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत या आधिकारिक बयान देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बुधवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कामले द्वारा इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया। इस आदेश के तहत यह कड़ा रुख पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों, मोर्चा, प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों और अधिकृत प्रवक्ताओं पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह रोक केवल टीवी डिबेट और रूटीन बयानों पर है, कांग्रेस की अधिकृत पत्रकार वार्ताओं पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

मुख्यमंत्री परिवार पर लगे कथित भूमि घोटाले को दबाने का आरोप

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से जारी इस पत्र में मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है। इसके बावजूद प्रदेश के अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनलों ने न तो इस खबर को प्रमुखता से प्रसारित किया और न ही इस विषय पर कोई टीवी बहस आयोजित की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मीडिया इस गंभीर मुद्दे को दबाकर जनता का ध्यान अन्य भटकाऊ मुद्दों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है।

लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराएंगे असहमति

कांग्रेस संगठन का कहना है कि चौथे स्तंभ मीडिया के इस रवैये के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति और विरोध दर्ज कराने के लिए ही इस मौन सत्याग्रह का रास्ता चुना गया है। अगले तीन दिनों तक टीवी चैनलों की बहसों में कांग्रेस का कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं दिखेगा।

राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि पार्टी जहां एक तरफ इस कदम के जरिए मीडिया पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नेताओं की आपसी खींचतान और बयानों से होने वाली किरकिरी से बचने के लिए भी इस मौन का सहारा लिया गया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस का यह तीन दिनों का मौन आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है।

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