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बंगाल में कमल का प्रचंड खिलना, 195 सीटों के साथ बीजेपी की ऐतिहासिक बढ़त, टीएमसी सिमटी

यह जीत सिर्फ जीत नहीं बल्कि वैचारिक है

बंगाल में कमल का प्रचंड खिलना, 195 सीटों के साथ बीजेपी की ऐतिहासिक बढ़त, टीएमसी सिमटी

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 195 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) महज 92 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। इस तरह बीजेपी, टीएमसी से 103 सीटों से आगे चल रही है और राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही है।चुनाव आयोग के मुताबिक294 सीटों वाले बंगाल विधानसभा चुनाव बीजेपी 195 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं टीएमसी सिर्फ 92 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है। इस तरह बीजेपी टीएमसी की अपेक्षा 103 सीटों से आगे चल रही है। ऐसे में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना रही है।

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बंगाल में भाजपा की यह जीत महज आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि गहरी वैचारिक विजय है, जिसकी नींव डॉ. मुखर्जी ने रखी थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों के आधार पर ही 1980 में बीजेपी की नींव रखी गई थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बीजेपी के पितामह कहा जाता हैं, जिनका सपना अब कहीं जाकर साकार हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नारा दिया था, ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे। कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद, बीजेपी के लिए बंगाल जीतना वैचारिक चक्र को पूरा करने जैसा था। या. बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह से लेकर पीएम मोदी तक जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा करने का वादा करते रहे हैं, जिसे साकार करके दिखाया।

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पीएम मोदी ने विजय संकल्प सभा में किया था श्यामा प्रसाद का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में विजय संकल्प सभा के दौरान सियासी माहौल को देखकर कहा था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने कहा कहा था कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त करके बीजेपी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्पों में से एक को पूरा किया। बंगाल में नई भाजपा सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राज्य की समृद्धि के सपने को पूरा करेगी और अवैध घुसपैठ के मुद्दे का समाधान करेगी।बंगाल में अब भाजपा बहुमत डॉ. मुखर्जी के उस विजन की जीत है, जिसमें उन्होंने एक अखंड और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ भारत की कल्पना की थी। पार्टी नेतृत्व ने इस चुनाव को ‘अंतिम युद्ध’ की तरह लड़ा। पीएम मोदी की रैलियों से लेकर बूथ स्तर तक ‘प्रवास’ करने वाले कार्यकर्ताओं ने बंगाल को यह समझाने में सफलता पाई कि भाजपा ‘बाहरी’ नहीं, बल्कि बंगाल की असली ‘मिट्टी की पार्टी’ है।

मुखर्जी की जन्मभूमि कैसे बनी रही बंजर 
श्यामा  प्रसाद मुखर्जी का जन्म 1901 में कोलकाता के बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का आगाज 1929 से किया और कांग्रेस से जुड़े। हालांकि, एक साल बाद ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। 1939 में वे हिंदू महासभा में शामिल हुए और 1940 में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनकी काबिलयत को देखते हुए अपने मंत्रिमंडल में मुखर्जी को उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया था। हालांकि बहुत दिनों तक साथ नहीं रहे। नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा देकर साल 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ का गठन किया। ये वही भारतीय जनसंघ है, जिसके वैचारिक एजेंडे पर बीजेपी का गठन हुआ। जनसंघ से लेकर बीजेपी तक के लिए 75 साल तक बंगाल की जमीन सियासी बंजर बनी रही। लेफ्ट के 34 साल और तृणमूल कांग्रेस के 15 सालों ने भाजपा को एक सीमांत ताकत बनाकर रखा था।

यह जीत सिर्फ जीत नहीं बल्कि वैचारिक है

कोलकाता के बीजेपी मुख्यालय ‘हेस्टिंग्स’ में आज गुलाल उड़ रहा है, लेकिन यह जश्न सिर्फ जीत का नहीं है। यह उस संकल्प के पूरा होने का है, जो 1951 में डॉ. मुखर्जी ने लिया था। पहली बार बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई ‘कमल’ का सिपाही बैठेगा। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि उन्होंने उस धरती पर अपनी सत्ता स्थापित की है, जहां से उनके वैचारिक पूर्वज ने भारत को एक नई दिशा देने का साहस किया था।

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