कटनीजबलपुरमध्य प्रदेश

कटनी को अब नई सरकार से विकास की आस

रिंग रोड, ट्रांसपोर्ट नगर, मेडिकल कॉलेज की योजना पर काम तेज होना जरूरी, औद्योगिक विकास के मामले में भी पिछड़ रहा कटनी

मंत्रिमंडल के गठन में कटनी के हाथ खाली, क्या नए साल में सौगातों से भरेगी झोली

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कटनी, यशभारत। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सूबे की नई सरकार का गठन हो चुका है। तस्तरी में परोसकर चारों सीटें भाजपा को दे देने वाले कटनी जिले को मंत्रिमंडल में तो स्थान नही मिल पाया, लेकिन विकास के मामले में अपेक्षा की जा सकती है कि नई सरकार इस क्षेत्र की जरूरतों को समझेगी। जिले में चारों विधायक सत्ताधारी दल के हैं, ऐसे में कोई वजह नही रह जाती कि विकास की योजनाएं आगे न बढें़। विधानसभा चुनाव के पहले चारों विधानसभा क्षेत्रों में जनता से जो वायदे किये गए अब उन्हें अमल में लाने का समय आ गया है।
बरस 2023 कटनी को मंत्रिमंडल में तवज्जो न मिलने का जख्म देकर बीत रहा है। नए साल की शुरुआत विकास की कुछ ठोस योजनाओं के साथ होगी ऐसी अपेक्षा की जा सकती है। चारों विधायकों को कटनी को महानगर स्तर की सुविधाएं दिलाने के लिए प्रयास करने होंगे। शिक्षाए स्वास्थ्य से लेकर शुध्द पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के मामले में यह जिला प्रदेश के दर्जनों जिलों से पीछे है। श्रेय की राजनीति की होड़ में जिले के नागरिक रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रहे हैं। चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले मुख्यमंत्री द्वारा मेडिकल कॉलेज की सौगात कटनी को दी गई। इसके लिए जमीन का चयन भी हो चुका है। अब सरकार के स्तर पर बजट आबंटन की प्रक्रिया जल्द से जल्द होना चाहिए, ताकि इस बड़ी योजना पर काम आगे बढ़ सके। सामूहिक प्रयासों के फलस्वरूप घोषणा तो हो गई लेकिन इसे धरातल में उतारने के लिए अभी और प्रयास करने होंगे। पीरबाबा से रिंग रोड निर्माण का काम भी अधूरा है। शहर के चारों तरफ के मुख्य रास्तों को एक दूसरे से कनेक्ट करने के इस प्रोजेक्ट को सालों से पूरा नही किया जा सका है। निर्माण में जो भी बाधाएं आ रही हैं उनके निराकरण के प्रयास भी सभी विधायकों को मिलकर करना चाहिए।
फटेहाली के टाट पर पैबंद की कोशिशें
शहर के बेतरतीब यातायात को लेकर फटेहाली के टाट पर पैबंद की कोशिशें जब तब होती रहती हैं लेकिन सार कुछ नही निकलता। पार्किंग को व्यवस्थित करने के प्रयोग कई मर्तबा हो चुके लेकिन शहर को अराजकता से मुक्ति नही मिल सकी। वन-वे ट्रैफिक और मार्गों के निर्धारण के बावजूद जाम की समस्या का स्थायी हल नहीं निकाला जा सका। मल्टी स्टोरी पार्किंग की योजना फाइलों में धूल खा रही है। इस दिशा में भी काम करने की जरूरत हैं।
अब तक शिफ्ट नहीं हुए ट्रांसपोर्टर्स
कटनी में ट्रांसपोर्ट नगर की रामकहानी तो जैसे स्थायी समस्या बन चुकी है। तीन दशक गुजर जाने के बावजूद कटनी के ट्रांसपोर्टर्स को शिफ्ट नही किया जा सका। ट्रांसपोर्ट नगर में सुविधाएं जुटाने के बावजूद ट्रांसपोर्ट व्यवसायी यहां जाने को तैयार नही। भूखंड के आवंटन में दरों पर सहमति के तमाम प्रयासों के बावजूद कारोबारी शहर से हटने तैयार नहीए नतीजतन शहर के भीतर लोडिंग अनलोडिंग की समस्या अब भी बनी हुई है और ट्रैफिक जाम से निजात नही मिल पा रही।
कागजों में हुआ विकास
आंकड़ों को खंगाला जाए तो बहुतायत योजनाओं में प्रगति शून्य ही रही है। फूड पार्क और टेक्सटाइल हब को लेकर सालों पहले कलेक्ट्रेट के समीप 10 हेक्टेयर जमीन सुरक्षित की गई थी लेकिन इस योजना को पंख नही लग सके। 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खिरहनी में टेक्सटाइल हब बनाने की घोषणा तो कर दी लेकिन इस पर एक इंच काम आगे नही बड़ा। क्या नई सरकार और कटनी के चारों विधायक इस पर प्रयास करेंगे। चूने के बाद कटनी की पहचान मार्बल उद्योग की वजह से थी लेकिन राज्य सरकार की नीतियों ने इस उद्योग को भी बर्बाद कर दिया। रॉयल्टीए डेडरेंट व स्टाम्प ड्यूटी की मार मार्बल व्यवसायियों पर ऐसी पड़ी की उन्होंने बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया। कुल मिलाकर नई सरकार से अपेक्षा है कि वह कटनी जिले को विकास के मामले में निराश नही करेगी।
जिले का औद्योगिक विकास भी फिसड्डी, सुविधाओं के अभाव मेें टूटी उद्योगों की कमर
प्रदेश में राजस्व का एक बड़ा हिस्सा देने के बावजूद कटनी में औद्योगिक विकास की रफ्तार मंद पड़ी हुई है। सुविधाओं के अभाव में उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं। राइस और दाल मिलों के लगातार बंद होते जाने से लोग बेरोजगार हो रहे हैं। सूक्ष्मए लघु और मध्यम उद्यम के आंकड़ों की बात करें तो कटनी जिले में 18 हजार से ज्यादा उद्योग रजिस्टर्ड हैं। इसमें 16992 सूक्ष्म, 115 लघु तथा 19 मध्यम उद्योग हैं, लेकिन इनकी जमीनी हकीकत परखी जाए तो इनमें से ज्यादातर कागजों में मिलेंगे। सुविधाओं के अभाव में ज्यादातर उद्योगों की कमर टूट चुकी है। शासन स्तर पर इन्हें ऑक्सीजन देने के प्रयास भी नही हो रहे। जनप्रतिनिधियों को सबसे पहले इस दिशा में विचार करना चाहिए।

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