जबलपुरमध्य प्रदेश

एक्सपोर्ट हब की सूची से जबलपुर बाहर, विवेक तन्खा बोले—‘क्या यह सोची-समझी साजिश?’

स्टोन क्राफ्ट से हरे मटर तक दमदार क्षमता, फिर भी सौतेला व्यवहार

जबलपुर,यशभारत। केंद्र सरकार की उस योजना को लेकर जबलपुर की राजनीति गरमा गई है, जिसके तहत देश के करीब 500 जिलों को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश के पांच जिलों को योजना में शामिल किए जाने के बावजूद जबलपुर का नाम सूची से बाहर रहने पर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे जबलपुर की लगातार हो रही उपेक्षा से जोड़ते हुए पूछा है कि ‘क्या यह जबलपुर को आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर करने की सोची-समझी साजिश है?’

तन्खा बोले—जबलपुर की सहनशीलता कमजोरी न बन जाए

विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि जबलपुरवासियों की उदारता और सहनशक्ति अब उनकी कमजोरी बनती जा रही है। उन्होंने एक्सपोर्ट हब की सूची में जबलपुर को जगह नहीं मिलने पर चिंता जताते हुए कहा कि शहर में निर्यात की पर्याप्त संभावनाएं होने के बावजूद एक बार फिर इसकी अनदेखी की गई है।

पांच जिलों को मिली जगह, जबलपुर फिर बाहर

योजना के तहत मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए चुने जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के निर्यात आधार को मजबूत करना और स्थानीय एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना है। ऐसे में जबलपुर का सूची से बाहर रहना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

स्टोन क्राफ्ट से हरे मटर तक, संभावनाओं की कमी नहीं

तन्खा ने जबलपुर और महाकौशल की निर्यात क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में रक्षा उत्पादन, स्टोन क्राफ्ट, हरा मटर और विभिन्न कृषि उत्पादों के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। जबलपुर का हरा मटर देश के कई हिस्सों के साथ विदेशों तक पहुंचता है और अपनी गुणवत्ता के लिए पहचान रखता है। इसके बावजूद उचित ब्रांडिंग और निर्यात की बेहतर व्यवस्था का अभाव क्षेत्र की क्षमता को सीमित कर रहा है।

उद्यमियों को मिल सकता था बड़ा फायदा

स्थानीय उद्यमियों का मानना है कि यदि जबलपुर को एक्सपोर्ट हब योजना में शामिल किया जाता तो स्थानीय उद्योगों और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलती। इससे निर्यात बढ़ने के साथ नए उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते थे।

अब उठ रहा बड़ा सवाल

जबलपुर को योजना से बाहर रखे जाने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि जिस शहर और महाकौशल क्षेत्र में निर्यात की इतनी संभावनाएं हैं, उसे ऐसी महत्वपूर्ण योजना में जगह क्यों नहीं मिली। विवेक तन्खा के सवाल ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र और राज्य सरकार जबलपुर की इस मांग और आपत्ति पर क्या जवाब देती हैं।

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