जबलपुरमध्य प्रदेश

यश भारत की खबर का असर; धान उपार्जन में फर्जी सिकमीनामें; पटवारियों ने खसरे में की हेराफेरी, ऑपरेटरों ने कर दिए रजिस्ट्रेशन

एक्सक्लूसिव ,,गिरदावरी में खाली जमीनों पर दिखाई गई धान की फसल, व्यापारियों ने उठाया फायदा

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जबलपुर, यश भारत। एक ओर जहां जिला प्रशासन ने धान उपार्जन में फर्जी रजिस्ट्रेशन को लेकर जिला प्रशासन सिकमिनामें और उनके सत्यापन करने वाले अधिकारियों की जांच में लगा हुआ है । वहीं दूसरी तरफ यश भारत को एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली है। जहां पटवारी द्वारा उन जमीनों की गिरदावरी कर दी गई जहां धान की खेती की ही नहीं गई थी। जिसके चलते व्यापारियों द्वारा उक्त जमीन के सिकमीनामें तैयार करके रजिस्ट्रेशन करवा लिए गए और अब उनमें धान की बिक्री चल रही है। जबकि नियम अनुसार जिन जमीनों पर धान की बुवाई नहीं हुई थी तो वह खसरे भी
ई- उपार्जन पोर्टल पर अपलोड नहीं होने थे।

यह है व्यवस्था

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन करने के लिए सरकार द्वारा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है । यह रजिस्ट्रेशन उन किसानों का होता है जिनके खेत में धान की फसल लगी होती है। इसके लिए क्षेत्र का पटवारी एक सर्वे रिपोर्ट तैयार करता है। जो सेटेलाइट के माध्यम से देखा है कि किस खेत में कौन सी फसल लगाई गई है और वह उसे ऑन लाइन खसरे नंबर के साथ अपलोड करता है। जिसे गिरदावरी कहा जाता है। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रजिस्ट्रेशन का कार्य प्रारंभ होता है। जब किसान अपने दस्तावेज लेकर सहकारी समितियों और अन्य ऑनलाइन सेवा प्रदान करता के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवाने जाता है तो वह उसकी जमीन का खसरा ई उपार्जन पोर्टल पर देखते हैं यदि वहां धान की फसल होती है तो उसका रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पटवारी के द्वारा उन खेतों को भी उपार्जन पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया जहां धान की फसल थी ही नहीं जिसके चलते इतनी बड़ी मात्रा में फर्जीवाड़ा चल रहा है। क्योंकि किसान ने फसल न होने के चलते धान का रजिस्ट्रेशन करवाया ही नहीं और व्यापारियों द्वारा किसान की जमीन का फर्जी सिकमिनामा बनाकर रजिस्ट्रेशन अपने नाम से करवा लिया गया।

यहां सबसे ज्यादा मामले

वैसे तो जबलपुर जिले में धान की फसल बहुत बड़े क्षेत्र में होती है लेकिन शहपुरा, पाटन पश्चिम और कटंगी के क्षेत्र में मटर रहर और मक्के की फसल का रखवा धन से कहीं अधिक है लेकिन इन तीनों ही फसलों की जबलपुर में समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होती इसके चलते यहां की हजारों हेक्टेयर जमीन पर रजिस्ट्रेशन नहीं होते क्योंकि यहां धान की फसल नहीं बोई जाती है जिसका फायदा व्यापारियों और पटवारी द्वारा मिलकर उठाया गया है और बड़ी मात्रा में यहां खाली पड़े खसरों पर धान की गिरदावरी कर दी गई और फिर व्यापारियों द्वारा सिकमीनामा तैयार करके उन जमीनों की रजिस्ट्रेशन अपने नाम से तैयार कर लिए गए।

अधिक हुई थी मक्के की खेती

इस पूरे मामले में कृषि विभाग का सर्वे बताता है कि जिले में मक्के के रकबे में 150 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। यह इजाफा उन क्षेत्रों में हुआ है जहां पहले धान की फसल बोई जाती थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब धान का रकबा कम हुआ है और मक्के का रखवा बड़ा है तो ऐसे में रजिस्ट्रेशन की संख्या पहले से ज्यादा कैसे हो गई। वहीं दूसरी तरफ जिले में बासमती धान का रखवा भी पहले से लगभग दो गुना हो गया है, जो ओपन मार्केट में बेची जाती है न कि समर्थन मूल्य पर। ऐसे में गिरदावरी में हुई गंभीर अनियमितताएं फर्जी रजिस्ट्रेशन का कारण बनी है। जिसकी गवाही खुद सरकारी आंकड़े दे रहे हैं, जहां पूरे प्रदेश में कुल रजिस्ट्रेशन का 5% ही सिकमीनामें है वही जबलपुर में यह 25 प्रतिशत है । वही कुछ पंजीयन केंद्रों पर तो यह 40 प्रतिशत से भी अधिक है।

  • गिरदावली में हुआ गोलमाल, व्यापारियों ने उठाया फायदा

    पटवारियों ने खसरे में की हेरा फेरी, ऑपरेटरो ने कर दिए रजिस्ट्रेशन

    यश भारत की खबर का असर,,,
    फर्जी पंजीयन मामले में एसडीएम और तहसीलदार पर आरोप पत्र जारी दो पटवारी हुए सस्पेंड
    जबलपुर – यश भारत द्वारा 11 और 13 दिसंबर को मझौली क्षेत्र में हुए फर्जी पंजीयन को लेकर समाचार प्रकाशित किया था इसके बाद गुरुवार को कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए धान उपार्जन पंजीयनों के सत्यापन में गम्भीर अनियमितता बरतने के मामले में सिहोरा के तत्कालीन अनुविभागीय राजस्व अधिकारी धीरेंद्र सिंह एवं मझौली के प्रभारी तहसीलदार आदित्य जंघेला को आरोप पत्र जारी किया। मझौली तहसील के दो पटवारी राहुल पटेल एवं अभिषेक कुमार विश्वकर्मा को निलंबित किया । कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर कार्यवाही की गई। इसके अलावा पाटन और शहपुरा क्षेत्र में भी इस तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। जिनकी जांच चल रही है जिस पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है इसके अलावा मझौली वृताकार समिति की जांच करने वाले खाद्य विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है ।

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