खामोशी को हौसलों की आवाज बना गौरांशी ने रचा इतिहास

खामोशी को हौसलों की आवाज बना गौरांशी ने रचा इतिहास
– डेफलिंपिक्स में जीता स्वर्ण, एशिया पैसिफिक डेफ गेम्स में रजत
भोपाल, यशभारत। सुन और बोल न पाने की चुनौती को अपनी ताकत बनाकर गौरांशी शर्मा ने खेल जगत में देश का नाम रोशन किया है। बैडमिंटन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने वाली गौरांशी ने 2022 डेफलिंपिक्स में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2024 के एशिया पैसिफिक डेफ गेम्स में भारतीय टीम के साथ रजत पदक हासिल किया।
गौरांशी का जुड़ाव आशा निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बधिरों के लिए, से रहा है। उनके माता-पिता भी इसी विद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। परिवार ने बचपन से ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपनी प्रतिभा को पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया। विद्यालय के शिक्षकों ने भी उनकी प्रतिभा को पहचाना और खेलों में आगे बढ़ने के अवसर दिए।
रैकेट बना सपनों की आवाज
बैडमिंटन ने गौरांशी को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया। कोर्ट पर उन्होंने आवाज और निर्देशों के बजाय अपनी दृष्टि, एकाग्रता, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को ताकत बनाया। राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। ब्राजील के काशियास दो सुल में 2022 में आयोजित 24वें समर डेफलिंपिक्स में भारतीय मिक्स्ड टीम बैडमिंटन स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2024 में मलेशिया में आयोजित 10वें एशिया पैसिफिक डेफ गेम्स में टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।







