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करोड़ों के खर्च के बाद भी नहीं बढ़ी फ्लाइट्स: जबलपुर एयरपोर्ट पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने पूछा, "यह कैसा सौतेला व्यवहार?"

करोड़ों के खर्च के बाद भी नहीं बढ़ी फ्लाइट्स: जबलपुर एयरपोर्ट पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

जबलपुर, मध्य प्रदेश: जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट के विस्तार पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद, यहां से उड़ानों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। नागरिक उपभोक्ता मंच द्वारा 2024 में दायर एक याचिका के बाद, एक कानून के छात्र द्वारा भी हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमान कंपनियों से 10 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।

कम कनेक्टिविटी से बढ़ रही है परेशानी

याचिकाकर्ता, कानून के छात्र पार्थ श्रीवास्तव की ओर से सीनियर अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि जहां भोपाल जैसे छोटे हवाई पट्टी वाले शहरों में 50 से अधिक और इंदौर में 80 से अधिक उड़ानें संचालित हो रही हैं, वहीं जबलपुर में केवल 9 फ्लाइट्स ही चल रही हैं। इसका सीधा असर शहर के लोगों पर पड़ रहा है। कम कनेक्टिविटी के कारण न केवल मरीज और डॉक्टर परेशान हो रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले वकीलों को भी कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए नागपुर, भोपाल या इंदौर जाना पड़ता है।

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हाई कोर्ट ने पूछा, “यह कैसा सौतेला व्यवहार?”

याचिका में इस स्थिति को जबलपुर के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ बताया गया है। वकील ने दलील दी कि सरकार ने एयरपोर्ट के विस्तार पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन सुविधाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए, मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय शराब की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और विमानन कंपनियां इस मामले पर क्या जवाब देती हैं और क्या जबलपुर के लोगों को जल्द ही बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिल पाती है।

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