महंगा सोना, सुस्त बाजार: गहनों की चाह और जेब की मजबूरी के बीच फंसे ग्राहक पति पत्नी में सोने चांदी की खरीदारी को लेकर बहस का आगमन

महंगा सोना, सुस्त बाजार: गहनों की चाह और जेब की मजबूरी के बीच फंसे ग्राहक
पति पत्नी में सोने चांदी की खरीदारी को लेकर बहस का आगमन
भोपाल यश भारत । शादी ब्याह का सीजन नजदीक है लेकिन इस बार सराफा बाजार में पहले जैसी रौनक नजर नहीं आ रही। सोने चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने से ग्राहक खरीदारी को लेकर सोच समझकर फैसला ले रहे हैं। इसका असर न केवल बाजार पर दिखाई दे रहा है बल्कि कई परिवारों के घरेलू बजट और निर्णयों पर भी पड़ रहा है। राजधानी भोपाल के सराफा बाजार में व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में सोने और चांदी की खरीदारी में औसतन 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में सोने चांदी की सीमित हुई खरीदारी, शादी सीजन के बावजूद ग्राहक बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार सीमित मात्रा में ही आभूषण खरीद रहे हैं। खरीदारी के लिए पहुंचीं कई महिलाओं ने बताया कि सोना भारतीय परिवारों में केवल निवेश का माध्यम नहीं बल्कि परंपरा सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी है। हालांकि बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ रहा है। कुछ महिलाओं ने कहा कि गहनों की खरीदारी को लेकर घर में पति पत्नी के बीच मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं। जहां महिलाएं पारंपरिक जरूरतों और सामाजिक अपेक्षाओं का हवाला देती हैं वहीं परिवार के अन्य सदस्य बढ़ते खर्च और बजट का तर्क दे रहे हैं। सराफा व्यापारियों के अनुसार पहले ग्राहक मुख्य रूप से 18 20 22 और 24 कैरेट के आभूषणों की मांग करते थे लेकिन अब बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए 9 12 और 14 कैरेट के आभूषणों की मांग भी बढ़ रही है। कई ज्वेलरी शोरूम में कम बजट वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर ऐसे विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना चांदी कम खरीदने के आवाहन को राष्ट्रहित के लिए जरूरी बताया , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय समय पर भौतिक सोने के बजाय अन्य निवेश विकल्पों को प्रोत्साहित किए जाने पर भी लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रहित में बताया और कहा कि इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी तथा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं कई महिलाओं का मानना है कि भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक भी है इसलिए इसकी उपयोगिता कम नहीं हो सकती। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक अब निवेश और शादी की खरीदारी को अलग-अलग नजरिए से देखने लगे हैं। जहां निवेश के लिए लोग वैकल्पिक साधनों पर विचार कर रहे हैं, वहीं शादी ब्याह की जरूरतों के लिए न्यूनतम आवश्यक खरीदारी की जा रही है। सर्राफा व्यापारियों ने सोने चांदी की मंदी को किसानों की आय से जोड़ा इस दौरान कुछ व्यापारियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तो इसका सकारात्मक असर सभी व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ेगा। व्यापारियों के अनुसार खेती की बढ़ती लागत और फसलों के अपेक्षित दाम नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की, ताकि बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़े और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सके।अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार चढ़ाव को लेकर आ सकती है सोने चांदी में गिरावट व्यापारियों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार चढ़ाव के चलते आने वाले समय में सोने की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो शादी सीजन में सराफा बाजार की रौनक लौटने की संभावना है। फिलहाल महंगे सोने ने ग्राहकों व्यापारियों और परिवारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।





