
जबलपुर, यश भारत। भगवान गणेश का प्रकट उत्सव गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। गणेश उत्सव 25 सितंबर तक चलेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह करीब 7.06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7.44 बजे तक रहेगी। अलग-अलग पंचांगों में स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी भी एक ही दिन पड़ रही हैं।
सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश माने गए हैं। ऐसे में इस दिन शिव और गणेश उपासना का विशेष महत्व रहेगा। मान्यता है कि गणेश पूजा से बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गणेश चतुर्थी पर घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें और गणेश जी को सिंदूर, हल्दी, कुमकुम, चावल, चंदन, फूल, दूर्वा, धूप, दीप, फल और मोदक अर्पित करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, भोजन और सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी किया जा सकता है।
इस दिन गणेश मंत्र, गणेश अथर्वशीर्ष, स्तुति और आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है। शिव परिवार की पूजा करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय का अभिषेक किया जा सकता है। शिवलिंग पर चंदन, माता पार्वती को लाल चुनरी, चूड़ियां, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर आरती करें।भगवान गणेश को हरी दूर्वा, लाल फूल, विशेषकर गुड़हल, लाल चंदन, सिंदूर और शमी के पत्ते चढ़ाना शुभ माना जाता है। भोग में मोदक, लड्डू, नारियल, फल और मिठाइयां रखी जा सकती हैं। गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता।







