IAS बनने का दावा निकला झूठा, ससुर की RTI ने खोली तृप्ति की पोल

IAS बनने का दावा निकला झूठा, ससुर की RTI ने खोली तृप्ति की पोल
नौकरी के नाम पर डेढ़ करोड़ की ठगी का आरोप, घर से मिले फर्जी नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड
भोपाल । खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाने वाली तृप्ति सिंह के फर्जीवाड़े की परतें जांच के साथ खुलती जा रही हैं। खास बात यह है कि उसकी असली पहचान सामने लाने में किसी शिकायतकर्ता से ज्यादा उसके ससुर की RTI ने अहम भूमिका निभाई। तृप्ति के IAS होने के दावे पर ससुर को संदेह हुआ तो उन्होंने मसूरी स्थित प्रशासनिक अकादमी से उसके चयन और प्रशिक्षण की जानकारी मांगी। अकादमी से जवाब मिलने के बाद उसके दावे की पोल खुल गई।
जांच में सामने आया है कि तृप्ति कथित तौर पर सरकारी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अपने जाल में फंसाती थी। पुलिस की जांच में आधा दर्जन से अधिक लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपए ऐंठने की बात सामने आई है। नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने के आरोपों की पुलिस पड़ताल कर रही है।
अफसर दिखने के लिए घर में बना रखा था पूरा तामझाम
तृप्ति ने लोगों को अपनी पहचान पर भरोसा दिलाने के लिए घर में ही फर्जी अधिकारी का पूरा सेटअप तैयार कर रखा था। पुलिस को तलाशी के दौरान फर्जी लेटरहेड, आईडी कार्ड, नियुक्ति पत्र और ट्रेनिंग किट मिली है। वह खुद को पर्यटन विभाग की अतिरिक्त संचालक बताकर लोगों से संपर्क करती थी।
सोशल मीडिया पर भी दिखाती थी सरकारी रुतबा
जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति केवल सोशल मीडिया पर अधिकारी होने का दावा नहीं करती थी, बल्कि सरकारी कार्यालयों में भी इसी पहचान के साथ पहुंचती थी। अयोध्या नगर स्थित नगर निगम के वार्ड कार्यालय में उसके निरीक्षण का वीडियो सामने आया है, जिसे उसने सोशल मीडिया पर साझा किया था। विधानसभा परिसर के वीडियो भी उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर मिले हैं।
पुलिस अब उसके सोशल मीडिया अकाउंट, सरकारी अधिकारियों के साथ तस्वीरों और वीडियो की जांच कर रही है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने फर्जी अधिकारी बनकर कितने लोगों से संपर्क किया और इस पूरे नेटवर्क में उसके साथ और कौन लोग जुड़े थे।







