कंपाउंडर की आड़ में चल रहा था देश विरोधी नेटवर्क, एमपी में युवाओं के ब्रेन वॉश का मिला था टास्क, भोपाल और देवबंद से दो गिरफ्तार

कंपाउंडर की आड़ में चल रहा था देश विरोधी नेटवर्क, एमपी में युवाओं के ब्रेन वॉश का मिला था टास्क, भोपाल और देवबंद से दो गिरफ्तार
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश में एक बार फिर बड़े राष्ट्रविरोधी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने राजधानी भोपाल के काजी कैंप इलाके से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह नाम के एक संदिग्ध को दबोचकर देश के खिलाफ रची जा रही एक खतरनाक साजिश को समय रहते विफल कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी पूछताछ में यह बात सामने आई है कि फराज को सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मध्य प्रदेश में स्लीपर सेल तैयार करने और गरीब व कुंवारे युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की जिम्मेदारी दी थी।
देवबंद से जुड़ा दूसरा संदिग्ध भी गिरफ्तार, 16 जून तक रिमांड
फराज से मिली कड़ियों के आधार पर एटीएस ने उत्तर प्रदेश के देवबंद में छापेमारी कर उसके मुख्य सहयोगी नईम अब्दुल्ला को भी धरदबोचा है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों की संलिप्तता को देखते हुए उन्हें 16 जून तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि देवबंद में धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही फराज और नईम का संपर्क हुआ था। नईम ने ही फराज की बात पाकिस्तान में बैठे आकाओं से कराई थी, जिसके बाद वे प्रदेश में इस देशविरोधी नेटवर्क के विस्तार में जुट गए थे।
मिशन 2047 के तहत देश को अस्थिर करने की थी मंशा
एटीएस द्वारा अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों आरोपी मिशन 2047 के तहत देश में शरिया कानून स्थापित करने के एजेंडे पर काम कर रहे थे। वे समाज के पिछड़े और संवेदनशील युवाओं को यह कहकर भड़काते थे कि आजादी के बाद से देश में एक विशेष वर्ग के साथ लगातार भेदभाव किया गया है। इस झूठे नैरेटिव का सहारा लेकर वे युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे थे ताकि उन्हें देश के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके।
कंपाउंडर की नौकरी और ट्यूशन की आड़ में रची साजिश
जांचकर्ताओं को चकमा देने के लिए फराज भोपाल में बेहद सामान्य जिंदगी जी रहा था। वह पिछले 15 वर्षों से स्थानीय खुशबू क्लीनिक में कंपाउंडर के तौर पर कार्यरत था और साथ ही बैटरी रिपेयरिंग का काम भी करता था। पड़ोसियों के बीच उसकी पहचान एक सीधे-साधे और धार्मिक व्यक्ति की थी। वह और उसकी पत्नी अपने घर पर पहली से दसवीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे, और इसी की आड़ में हर मंगलवार को कुरआन की कक्षाएं भी चलाई जा रही थीं, जिसकी अब गहनता से जांच की जा रही है।
चार साल से सोशल मीडिया पर एक्टिव था आरोपी
एटीएस के मुताबिक, फराज पिछले चार साल से टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेहद सक्रिय था। वह युवाओं को जाल में फंसाने और संदिग्ध व भड़काऊ वीडियो शेयर करने के लिए गुप्त ग्रुप्स का संचालन कर रहा था। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक लैब भेज दिया है। अब जांच अधिकारी उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शंस खंगाल रहे हैं ताकि इस पूरे नेटवर्क को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और अन्य मददगारों का पता लगाया जा सके।
कार्रवाई के बाद से डॉक्टर और परिवार अंडरग्राउंड
गुरुवार तड़के 3:30 बजे करीब 12 अधिकारियों की टीम ने, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, फराज के घर को चारों तरफ से घेरकर छत के रास्ते उसे दबोचा था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से काजी कैंप स्थित फराज के घर पर ताला लटका हुआ है और उसका परिवार गायब है। वहीं, खुशबू क्लीनिक के संचालक डॉ. परवेज अली भी अपनी गिरफ्तारी के डर से फरार बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब फराज के कार्यस्थल और उसके सामाजिक दायरे से जुड़े लोगों से पूछताछ कर नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।






