गिरोह के गिरफ्त में आने के बाद सामने आए दूसरे फरियादी

गिरोह के गिरफ्त में आने के बाद सामने आए दूसरे फरियादी
– पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहा सवाल
भोपाल यशभारत। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के निजी सहायक सुधीर कुमार दुबे के महंगे मोबाइल को ढूंढने के लिए पुलिस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। चार दिनों के भीतर ही पुलिस की टीम ने चोर गिरोह को दबोच लिया। पुलिस ने पत्रकार वार्ता कर वारदात का खुलासा किया। वहीं पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह हे कि यदि डिप्टी सीएम के निजी सहायक के अलावा किसी आम आदमी का मोबाइल होता तो क्या पुलिस ढूंढ पाती। इसके पूर्व आईजी इंट के मोबाइल को भी ढूंढने में पुलिस ने जबरदस्त सक्रियता दिखाई थी। पुलिस की इन सफलताओं पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि चोर गिरोह के पकड़ में आने के बाद अन्य वारदातों के खुलासे का दावा किया गया। गिरोह की गिरफ्तारी के पहले तक ये वारदात सामने क्यों नहीं आईं थीं।
पुलिस ने नाबालिग सहित चार आरोपियों के कब्जे से 9 कीमती मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल समेत लगभग 4 लाख रुपये का चोरी का माल बरामद किया गया है। एडिशनल डीसीपी रश्मि अग्रवाल दुबे ने बताया कि यह कार्रवाई 11 नवंबर को फरियादी सुधीर कुमार दुबे की शिकायत के बाद शुरू हुई। फरियादी जेपी अस्पताल के सामने टहल रहे थे, तभी पीछे से आए मोटरसाइकिल सवार अज्ञात व्यक्तियों ने उनका महंगा मोबाइल झपट लिया और लिंक रोड नंबर एक की ओर भाग गए। टीटी नगर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया। टीम ने घटनास्थल के आसपास गहन पूछताछ की, मुखबिरों को सक्रिय किया और 250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी इनपुट की मदद से पता चला कि तीन युवक मोटरसाइकिल पर बाणगंगा की तरफ घूम रहे थे, शायद चोरी किए मोबाइल बेचने के इरादे से। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बाणगंगा में घेराबंदी कर फरदीन खान (निवासी अशोका गार्डन) को हिरासत में लिया। पूछताछ में फरदीन ने अपने साथी फैज़ और एक नाबालिग के साथ मिलकर मोबाइल लूटने की पूरी घटना कबूल कर ली।
एक दर्जन से अधिक वारदातों का दिया अंजाम
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने शहर भर में एक दर्जन से अधिक झपटमारी और मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने लूट के 4 अन्य मामले भी दर्ज किए, लेकिन इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि अगर यह मामला डिप्टी सीएम के पीए से जुड़ा न होता, तो क्या पुलिस इतनी सक्रिय होती।
पुलिस दबा कर रखती है ऐसे मामले
राजधानी में झपटमारी और चोरी की घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन पुलिस अक्सर इन मामलों को दबा कर रखती है। कई बार आम नागरिकों की शिकायतों पर लंबी खींचतान और निष्क्रियता देखी जाती है। यह मामला भी उसी सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है कि उच्च पदस्थ लोगों से जुड़ी शिकायतों पर पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाती है, जबकि आम जनता के मामले महीनों तक बिना हल के रह जाते हैं। पुलिस तकनीकी निगरानी और मुखबिर नेटवर्क का उपयोग नियमित रूप से करती, तो ऐसी वारदातों को पहले ही रोका जा सकता था।
नजर रखी जा रही है
पुलिस लगातार बदमाशों पर कार्रवाई कर रही है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है जो भी फरियादी आते हैं पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है।
– रश्मि अग्रवाल दुबे, एडिशनल डीसीपी







