वोट चोरी के आरोपों पर कटनी में सियासी संग्राम, कांग्रेस हमलावर तो भाजपा भी मैदान में उतरी, वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ बनाम लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ…
2027 के नगर निगम चुनाव से पहले ही शुरू हुई राजनीतिक लामबंदी, युवा मतदाताओं पर भाजपा की नजर, कांग्रेस सत्ता के खिलाफ नैरेटिव बनाने में जुटी

कटनी, यशभारत। देश की राजनीति में इन दिनों वोट चोरी और लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में है। दिल्ली के रामलीला मैदान से लेकर मध्यप्रदेश के शहरों तक इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच शक्ति प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसकी आंच अब कटनी की सियासत में भी साफ दिखाई देने लगी है। कांग्रेस जहां वोट चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा पर लगातार हमलावर है, वहीं भाजपा भी इन आरोपों का जवाब देने के लिए संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंवाद के जरिए मैदान में उतर चुकी है। दोनों दलों के बीच शुरू हुई यह राजनीतिक खींचतान केवल वैचारिक लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की जमीन तैयार करने की कवायद भी मानी जा रही है।
दो दिन पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली में कटनी से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी ने वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान के जरिए भाजपा के खिलाफ अपना राजनीतिक संदेश बुलंद किया। दूसरी ओर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जबलपुर में आयोजित पदयात्रा में भागीदारी कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की। भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ के नारे के साथ अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया है। जाहिर है कि अब लोकतंत्र और मतदाता के अधिकारों की बहस राजनीतिक दलों के लिए जनसमर्थन जुटाने का बड़ा माध्यम बनती जा रही है।
युवा मतदाता भाजपा की रणनीति के केंद्र में
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू युवा मतदाताओं को लेकर भाजपा की सक्रियता है। जिले की चारों विधानसभा सीटों पर युवा मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। बदलते राजनीतिक माहौल में जेन-जी और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का रुख राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा को भी इस वर्ग की राजनीतिक सोच और बदलते नजरिए को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत महसूस हो रही है। यही वजह है कि पार्टी विचार गोष्ठियों, महाविद्यालयों में संवाद और पदयात्राओं के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा की कोशिश है कि वोट चोरी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे राजनीतिक नैरेटिव का जवाब सीधे जनता के बीच जाकर दिया जाए। इसके लिए जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों में संवाद और विचार गोष्ठियों का सिलसिला शुरू किया जा रहा है, जिसे आगे मंडल स्तर तक ले जाने की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व की मंशा है कि भाजपा के नेता और जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर अपना पक्ष रखें और विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब दें।
कांग्रेस के लिए मुद्दा, भाजपा के लिए चुनौती
दूसरी ओर कांग्रेस इस मुद्दे को हाथ से जाने देने के मूड में नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी से मिलने वाले निर्देशों के अनुरूप जिला संगठन लगातार सक्रियता दिखा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर सत्ता हासिल की है। पार्टी इस मुद्दे को केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जोड़कर जनता के बीच ले जाने का प्रयास कर रही है।कांग्रेस की रणनीति भाजपा के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक माहौल तैयार करने की है। वहीं भाजपा इस अभियान को विपक्ष की राजनीतिक हताशा और अराजकता की राजनीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच असली मुकाबला केवल आरोप लगाने या जवाब देने का नहीं, बल्कि जनता के मन में अपनी बात को विश्वसनीय साबित करने का होगा।
चुनावी कैलेंडर ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता
इस सियासी सरगर्मी के पीछे आने वाले चुनावों का गणित भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। वर्ष 2027 में नगर निगम चुनाव प्रस्तावित हैं, 2028 में विधानसभा और 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। यानी अगले तीन वर्षों में मतदाताओं को कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लेने हैं। ऐसे में अभी से शुरू हुई राजनीतिक गतिविधियों को चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
कटनी जिले का संसदीय राजनीतिक गणित भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। जिले की तीन विधानसभा सीटें खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जबकि बड़वारा विधानसभा शहडोल संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। लंबे समय से कटनी को पृथक लोकसभा क्षेत्र बनाए जाने की मांग भी उठती रही है। भविष्य में परिसीमन की प्रक्रिया और संसदीय क्षेत्रों के संभावित पुनर्गठन के साथ यह मांग फिर राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।
लोकतंत्र की चिंता या वोट बैंक की लड़ाई?
दरअसल, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती है। कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे के जरिए भाजपा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करना चाहती है, जबकि भाजपा इस अभियान का जवाब देकर अपने समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और नए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश में है। कटनी की राजनीति में यह लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। खासकर तब, जब नगर निगम चुनाव नजदीक आएंगे और स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के साथ जुड़ने लगेंगे। सवाल यह भी है कि क्या वोट चोरी और लोकतंत्र की बहस आम मतदाता के रोजमर्रा के मुद्दों पर भारी पड़ेगी या फिर सड़क, पानी, यातायात, रोजगार और स्थानीय विकास जैसे सवाल चुनावी परिणामों की दिशा तय करेंगे? फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दल लोकतंत्र की रक्षा का दावा करते हुए अपने-अपने तरीके से जनता के बीच पहुंच रहे हैं। लेकिन इस सियासी संग्राम का अंतिम फैसला नारों, रैलियों और पदयात्राओं से नहीं, बल्कि मतदाता के विश्वास से ही होगा।







