यशभारत पॉलिटिकल डेस्क : भाजपा से कांग्रेस में लौटने वालों के लिए नया फॉर्मूला, पहले देना होगा ये सियासी इम्तिहान, तब होगी वापसी
भाजपा से कांग्रेस में लौटने वालों के लिए नया फॉर्मूला, पहले देना होगा ये सियासी इम्तिहान, तब होगी वापसी

कटनी, यशभारत। बीजेपी छोड़कर वापस कांग्रेस में वापसी की राह देख रहे नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि अब पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने वाले नेताओं को दोबारा शामिल करने के लिए आसान रास्ता नहीं मिलेगा। घर वापसी से पहले नेताओं को जिला स्तर पर जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी अब सीधे एंट्री के बजाय स्थानीय संगठन की सहमति अहम होगी। जाहिर है कटनी में जो नेता पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे, उनके लिए अब जिले की कोर कमेटी की सहमति जरूरी होगी।
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के नए रुख के मुताबिक बीजेपी से कांग्रेस में लौटने के इच्छुक नेताओं के नाम सबसे पहले जिला समन्वय समिति के सामने रखे जाएंगे। समिति संबंधित नेता की राजनीतिक पृष्ठभूमि, कांग्रेस छोड़ने की वजह और अब वापस आने की इच्छा के कारणों पर विचार करेगी। यदि समिति सर्वसम्मति से सहमति देती है, तो प्रस्ताव आगे भोपाल भेजा जाएगा। वहीं, समिति की ओर से आपत्ति होने पर वापसी की राह मुश्किल हो सकती है। कटनी जिला कांग्रेस के प्रभारी मनु मिश्रा के मुताबिक किसी भी नेता की वापसी पर फैसला लेने से पहले यह देखा जाएगा कि वह किन परिस्थितियों में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गया था और अब किन वजहों से लौटना चाहता है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
स्थानीय संगठन की सहमति जरूरी
कांग्रेस के इस रुख से साफ है कि पार्टी अब दलबदल करके वापस आने वाले नेताओं के मामले में स्थानीय संगठन की राय को प्राथमिकता देना चाहती है। जिला समन्वय समिति की बैठक में चर्चा के बाद ही संबंधित नामों को अंतिम निर्णय के लिए भोपाल भेजा जाएगा। इससे उन नेताओं के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है, जो दोबारा कांग्रेस में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
घर वापसी की राह पर टिकी नजरें
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में लौटने की इच्छा रखने वाले कुछ नेता फिलहाल इस मामले पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर जिला समन्वय समिति की बैठक पर टिकी है। देखना होगा कि किन नेताओं की वापसी को मंजूरी मिलती है और किनके नाम भोपाल तक पहुंच पाते हैं। कांग्रेस के इस कदम को दल बदलकर लौटने वाले नेताओं के लिए संगठनात्मक जांच-परख की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पार्टी स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय और संगठन के भीतर स्वीकार्यता को भी महत्व देने का संदेश दे रही है।
भाजपा ने महत्व न मिलने से परेशान
सूत्र बताते हैं कि कटनी में जो नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, वे बीजेपी में कोई महत्व न मिलने से परेशान है। करीब तीन साल का समय होने वाला है लेकिन भाजपा में उन्हें मात्र जिला कार्यकारिणी सदस्य ही बनाकर रखा है, इन्हें न तो कोई बड़ा पद मिला और न ही कोई दायित्व। कुछ तो ऐसे हैं जो जिला कार्यकारिणी में भी जगह नहीं पा सके। एक नेता ने यशभारत से चर्चा में कहा कि वे जल्द ही कांग्रेस की ओर रुख कर सकते है। कटनी में जो प्रमुख नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे उनमें पूर्व महापौर विजेंद्र मिश्रा, तत्कालीन जिला कांग्रेस शहर के अध्यक्ष विक्रम खम्परिया, महापौर प्रत्याशी श्रेहा खंडेलवाल, पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी सोनी, रौनक खंडेलवाल, सुजीत द्विवेदी समेत अनेक नाम शामिल है। जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी अनेक नेता और कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए थे। कुछ नेताओं का तो कुछ ही दिनों बाद भाजपा से मोहभंग हो गया था, ये वापस लौट आए थे।







