वीआईटी भोपाल के नाम और लोकेशन के विवाद पर एनएचआरसी सख्त: उच्च शिक्षा विभाग और यूजीसी से मांगा जवाब, चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

वीआईटी भोपाल के नाम और लोकेशन के विवाद पर एनएचआरसी सख्त: उच्च शिक्षा विभाग और यूजीसी से मांगा जवाब, चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
भोपाल,यशभारत। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसकी वास्तविक लोकेशन को लेकर खड़े हुए विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर तय की गई है।
यह पूरा मामला राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत पर सामने आया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर बड़ा भ्रम पैदा हो सकता है, जबकि वीआईटी का मुख्य परिसर भोपाल से करीब 100 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।
कानूनी स्थापना पर मुहर, पर लोकेशन पर सवाल
एनएचआरसी ने 22 अक्टूबर को हुई कार्रवाई के दौरान राज्य सरकार की शुरुआती रिपोर्ट और दस्तावेजों पर विचार किया। आयोग ने माना कि वीआईटी भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और इसकी स्थापना मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007 के तहत हुई है।
हालांकि, आयोग का मुख्य सवाल यह है कि वैधानिक नाम और वास्तविक स्थान के बीच इतनी लंबी दूरी होने के कारण क्या छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच गलत धारणा बन रही है? राज्य सरकार की पहली रिपोर्ट में इस बिंदु पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया था, जिस पर आयोग ने असंतोष जताया है।
वेबसाइट, प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों की होगी जांच
मानवाधिकार आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल यह तर्क देना पर्याप्त नहीं है कि संस्थान का नाम कानूनन तय हुआ है। आयोग ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पूछा है कि विश्वविद्यालय अपने प्रॉस्पेक्टस, आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन का उल्लेख किस प्रकार कर रहा है। विद्यार्थियों तक पहुँचने वाली जानकारी और उससे उत्पन्न होने वाले संभावित भ्रम के पहलुओं पर भी अब स्थिति साफ करनी होगी।
अनधिकृत क्लिनिक और अशांति के आरोप भी शामिल
शिकायत में केवल नाम और लोकेशन का ही मुद्दा नहीं उठाया गया था, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और पूर्व में हुई अशांति की घटनाओं के गंभीर आरोप भी शामिल थे। आयोग ने संज्ञान लिया है कि राज्य सरकार की पिछली रिपोर्ट में इन बिंदुओं की जांच का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
अब राज्य प्रशासन को अपनी अतिरिक्त रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक लोकेशन, प्रचार सामग्रियों में दी जाने वाली जानकारी तथा अन्य सभी शिकायतों पर की गई जांच की मौजूदा स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करना होगा। फिलहाल, आयोग की इस कार्रवाई में इन सभी आरोपों के संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष या दोष की पुष्टि अभी नहीं हुई है।







