संस्कार, साहस और श्रीराम: मंच पर महिलाओं का रामलीला में’राजतिलक’, 6 दशक बाद टूटी परंपरा…. पढ़ें पूरी खबर

मंडला। मंडला के सर्री गांव में इस नवरात्र पर रामलीला का मंचन हुआ। 1964 से हो रही इस रामलीला में पहली बार महिलाओं ने कलाकार के तौर पर किरदार निभाए। सृजेता नवयुवक मंडल ने यह पहल की। गांव की 18 से 50 साल की करीब 25 महिलाओं ने पिछले एक पखवाड़े से इसकी तैयारी की थी। 15 और 18 अक्टूबर को गौरी पूजन, राम विवाह व बारात का मंचन किया गया।
किरदार निभाने वाली महिलाएं आपस में रिश्तेदार भी हैं। राम का किरदार साक्षी हरदहा, लक्ष्मण का शिवानी जंघेला और सीता का शीतल जंघेला ने निभाया। भरत सीमा जंघेला और शत्रुघ्न सोनम सिंगौर बनीं। राजा दशरथ चित्रलेखा सिंगौर, राजा जनक माया सिंगौर और रानी सुनैना पूनम सिंगौर ने भी भूमिकाएं निभाईं।
महिलाओं ने दिया था प्रस्ताव
समिति अध्यक्ष आनंद सिंगौर ने बताया कि महिलाएं पहले भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय थीं। उन्हें रामलीला में अभिनय का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। महिलाओं में उत्साह है और वे अगली बार पूरी रामलीला करना चाहती हैं।







