625 करोड़ से बनेगी नई सेंट्रल जेल, 4000 कैदियों की क्षमता और हाईटेक सुविधाओं से होगी लैस

सागर, यशभारतlसागर शहर के बीचों-बीच स्थित 183 साल पुरानी गोपालगंज केंद्रीय जेल को अब शहर से बाहर चितौरा गांव में स्थानांतरित किया जाएगा। बढ़ती कैदी संख्या और विस्तार की सीमाओं को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन की पुनरावृत्तिकरण योजना के तहत यह निर्णय लिया गया है। चितौरा में चिन्हित 200 एकड़ (80 हेक्टेयर) भूमि पर बनने वाली इस नई और आधुनिक सेंट्रल जेल के नए डीपीआर को अंतिम रूप दे दिया गया है।
आगामी 25 वर्षों की कैदी वृद्धि दर का आकलन करते हुए तैयार की गई इस नई परियोजना की अनुमानित लागत करीब 625 करोड़ रुपए है, जबकि पूर्व में इसका बजट लगभग 250 करोड़ रुपए आंका गया था। नई जेल में कुल 4,000 कैदियों को रखने की क्षमता होगी, जिसमें 2,890 क्षमता वाले हाई सिक्योरिटी बैरक और 1,110 क्षमता वाले सामान्य बैरक बनाए जाएंगे।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया परिसर
चितौरा में बनने वाले इस विशाल और हाईटेक जेल परिसर में बंदियों के सुधार और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसमें 100 बिस्तरों का अस्पताल, आधुनिक मॉड्यूलर किचन, सब्जी कोल्ड स्टोरेज, प्रशिक्षण केंद्र, पुस्तकालय, गोशाला और आधुनिक मुलाकात कक्ष शामिल हैं। इसके अलावा परिसर की सुरक्षा के लिए हाईटेक बाउंड्रीवाल, चारों तरफ वॉच टावर, सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम बनाए जाएंगे।
कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 234 विभिन्न श्रेणियों के आवास गृह, पार्क, स्पोर्ट्स ग्राउंड, विद्युतीकरण सब-स्टेशन और अग्निशमन (फायर फाइटिंग) की आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
जेल की जमीन का ऑफसेट मूल्य 884 करोड़
गौरतलब है कि अंग्रेजी शासनकाल के दौरान वर्ष 1843 में बनी गोपालगंज सेंट्रल जेल वर्तमान में महज 40 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। इसकी निर्धारित क्षमता सिर्फ 894 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में यहां 1,800 से अधिक कैदी बंद हैं। शहर के बीच स्थित होने के कारण इस पुरानी जेल के विस्तार की गुंजाइश खत्म हो चुकी है।
जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, गोपालगंज स्थित वर्तमान जेल की जमीन का ऑफसेट मूल्य 884 करोड़ रुपए है। नई जेल के निर्माण के बाद शहरवासियों को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी और कैदियों को बेहतर व सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।







