सीएम का सहज अंदाज: अचानक स्कूल पहुंचे डॉ. मोहन यादव, बच्चों के चेहरे खिले, विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर जाना पढ़ाई का हाल, पदोन्नत पुलिस अधिकारियों को लगाए बैच

मंडला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंडला जिले के प्रवास के दौरान सहजता और आत्मीयता की मिसाल पेश की। टाटरी हेलीपेड जाते समय मुख्यमंत्री ने एक निजी पब्लिक स्कूल में अपना काफिला रुकवाया और वहां चल रही प्रार्थना सभा में शामिल विद्यार्थियों के बीच पहुंच गए। मुख्यमंत्री को अचानक अपने बीच पाकर बच्चे और शिक्षक उत्साहित नजर आए। मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनके नाम पूछे, वे किस कक्षा में पढ़ते हैं और उनकी पढ़ाई कैसी चल रही है, इसकी जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने-लिखने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री की इस अप्रत्याशित मुलाकात ने विद्यार्थियों की सामान्य सुबह को यादगार बना दिया।
बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री, पढ़ाई के लिए किया प्रेरित
स्कूल में उस समय बच्चों की नियमित प्रार्थना सभा चल रही थी। विद्यार्थी परमपिता परमेश्वर से सभी के कल्याण की प्रार्थना कर रहे थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपना काफिला रुकवाकर बच्चों से मिलने का निर्णय लिया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ सहजता से संवाद किया और उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया। मुख्यमंत्री का व्यवहार बच्चों के प्रति स्नेह और अपनत्व से भरा रहा। अचानक मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए यह मुलाकात विशेष अनुभव बन गई। मुख्यमंत्री की इस पहल से यह संदेश भी सामने आया कि बच्चों के साथ आत्मीय संवाद और उन्हें प्रोत्साहित करना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को खूब मन लगाकर पढ़ने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और भविष्य में बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
पदोन्नत पुलिस अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने लगाए बैच
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंडला प्रवास के दौरान जिले के दो पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति मिलने पर सम्मानित किया। डीएसपी पद पर पदस्थ श्री सतीश चतुर्वेदी और श्री पी.एस. वालरे को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नत होने पर मुख्यमंत्री ने बैच लगाए। इस अवसर पर जबलपुर संभाग के कमिश्नर श्री धनंजय सिंह, कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पदोन्नति के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को बैच लगाकर सम्मानित करना पुलिस विभाग में जिम्मेदारी और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पदोन्नत अधिकारियों को शुभकामनाएं दी गईं।
कान्हा एशिया का सबसे बड़ा नेशनल पार्क, पर्यटकों से आने की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंडला जिले के किसली (कान्हा) में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कान्हा नेशनल पार्क की विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कान्हा नेशनल पार्क देश ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। सघन वनों और समृद्ध प्राकृतिक वातावरण से घिरा कान्हा अनेक वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास है। मुख्यमंत्री ने वन्यजीव प्रेमियों, पर्यटकों और नागरिकों से अपील की कि वे वन्य प्राणियों के प्राकृतिक जीवन को करीब से देखने और प्रकृति की सुंदरता का अनुभव करने के लिए कम से कम एक बार कान्हा नेशनल पार्क अवश्य आएं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के समृद्ध वन वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद विचरण करने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और वन्यजीव विरासत पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की पहचान को मजबूत बना रही है।
बारहसिंगा को मिला पुनर्जीवन, कूनो में चीता परियोजना आगे बढ़ रही
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में बारहसिंगा को भी पुनर्जीवन मिला है। यह वन्यजीव धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रहा था, लेकिन संरक्षण के प्रयासों से इसके अस्तित्व को मजबूती मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना सफलता के साथ आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जंगलों में बाघ, चीता, तेंदुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल और गिद्ध जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और संरक्षण संबंधी गतिविधियां मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
असम के सहयोग से जंगली भैंसों का पुनर्वास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा और वहां की सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों के पुनर्वास की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि रविवार को छह मादा और आठ नर जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक परिवेश में छोड़ा गया। यह पहल प्रदेश की जैव विविधता को समृद्ध बनाने और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों की रक्षा करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।






