नगर सत्ता की छीछालेदर पर मौन क्यों है भाजपा जिला संगठन ? पार्षद का इस्तीफा महज सियासी ड्रामेबाजी, मेयर के खिलाफ प्रेशर पॉलिटिक्स
नगर निगम में विपक्ष की भूमिका निभा रहा सत्तापक्ष के पार्षदों का एक गुट

कटनी, यशभारत। कलेक्टर को इस्तीफा न देकर इंदिरा गांधी वार्ड के पार्षद ओमप्रकाश बल्ली सोनी ने नगर निगम प्रशासन पर लगाए गए आरोपों की हवा तो खुद निकाल दी, लेकिन यह घटनाक्रम नगर निगम की सियासत में कई सवाल खड़े कर रहा है। इसके साथ ही भाजपा संगठन पर भी सीधे तौर पर उंगली उठ रही है, जो पिछले चार साल में केवल तमाशबीन बना बैठा है। भाजपा के पार्षद दो गुटों में बटे हुए हैं और एक गुट लगातार महापौर प्रीति सूरी को कमजोर करने की कोशिशों में जुटा रहता है लेकिन भाजपा संगठन ने कभी इसे संज्ञान में नहीं लिया। सत्तापक्ष के दो समूहों में सीधे टकराव के बावजूद भाजपा के जिम्मेदारों ने हस्तक्षेप करते हुए एका कराने की कोशिश नहीं की, नतीजतन विपक्ष को चुटकियां लेने का मौका तो मिल ही रहा है, आम जनता में भाजपा की ही छीछालेदर हो रही है।
निकाय चुनाव को कम समय है, लिहाजा नगर सत्ता को लेकर अपनी अपनी रणनीतियों को धार देने का काम तेज कर दिया गया है। पिछले नगर निगम चुनाव में जनता ने भाजपा को आइना दिखाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति सूरी को मेयर की कुर्सी पर काबिज करा दिया था। विकास कार्यों को गति देने के नाम पर कुछ समय बाद प्रीति सूरी ने तो भोपाल जाकर भाजपा का दामन थाम लिया, लेकिन लगता है भाजपा ने कोई सबक नहीं लिया। अब तक चार साल के कार्यकाल में पूरे समय भाजपा के पार्षद दो फाड़ नजर आए। एक गुट को ऑक्सीजन कहीं और से मिलती रही, लेकिन इसका नेतृत्व नगर निगम के ही एक जनप्रतिनिधि द्वारा किया जा रहा है, जबकि दूसरे गुट के पार्षद महापौर प्रीति सूरी के साथ है। आलम यह है कि अपनी सत्ता को कांग्रेस के पार्षदों से कहीं अधिक परेशानी भाजपा के पार्षद ही पैदा करते आए हैं। चार साल के कार्यकाल में प्रीति सूरी ने सभी वार्डों में विकास की योजनाओं को लेकर काम तो किया लेकिन वे अपनी ही पार्टी के पार्षदों के राजनीतिक हमलों का सामना करती रही। जिस सत्तापक्ष को सदन की बैठकों में विपक्ष के पार्षदों को जवाब देना चाहिए, वे भाजपा पार्षद अपनी ही पार्टी की महिला महापौर को निशाने पर लेने से नहीं चूकते बुधवार को नगर निगम परिषद की बैठक में बरपा हंगामा और इसके बाद इस्तीफा कांड यही जाहिर करता है। कहा जा रहा है कि अगर ओमप्रकाश बल्ली सोनी को इस्तीफा देना ही था, तो वे चार साल से ज्यादा समय निकल जाने का इंतजार क्यों कर रहे थे। दूसरी बात इस्तीफा सीधे कलेक्टर को दिया जाना था, ताकि संभागायुक्त इसे स्वीकार भी कर लेते। नगर निगम अध्यक्ष को इस्तीफा देना क्या राजनीतिक ड्रामेबाजी नहीं। जाहिर सी बात है नगर निगम अध्यक्ष इस इस्तीफे को कलेक्टर के पास भेजने के बजाय बल्ली सोनी को ही लौटा देंगे। लोगों का कहना है कि अगर मेयर पर प्रेशर बनाने के लिए ये सब हथकंडे अपनाये जा रहे तो भाजपा जिला संगठन को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। भाजपा के जिलाध्यक्ष को इस पूरे मामले में क्यों खामोश बैठे हैं। क्या उन्हें नगर निगम के गलियारों में अपनी ही पार्टी की फजीहत दिखलाई नहीं पड़ रही। नगर निगम में हालात यही रहे तो आने वाले नगर निगम चुनाव में जनता कहीं पिछली कहानी न दोहरा दे। वैसे भी पार्टी इस दौर में अनेक चुनौतियों से जूझ रही है। भाजपा जिला संगठन को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष है तो जन समस्याओं को लेकर जनता त्रस्त है। कांग्रेस सत्तापक्ष पर लगातार हमलावर है, ऐसे में पिछले दरवाजे मिली नगर निगम की सत्ता कही हाथ से फिसल न जाए।
ये है इंदिरा गांधी वार्ड की हकीकत, 4 करोड़ के काम
नगर निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक में 392.14 लाख रुपये (करीब 4 करोड़ रुपये) की लागत के कुल 17 विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत कार्य या तो पूर्ण हो चुके हैं या प्रगतिरत हैं। इन स्वीकृत कार्यों में से अधिकांश का भूमिपूजन स्वयं महापौर प्रीति सूरी द्वारा किया जा चुका है, जबकि शेष बचे कार्य टेंडर और अनुबंध की प्रक्रियाओं में हैं। जब वार्ड में इतने काम हुए हैं तब पार्षद द्वारा इस्तीफे की पेशकश समझ से परे है।







