सपने में बोली बूढ़ी माई, जबलपुर घुमाई दे, सविता मिश्रा ने साझा किया 33 वर्षीय देवी गीत गायन का सफर

जबलपुर,यशभारत। शहर के सुप्रसिद्ध भजन गायिका सविता मिश्रा आज ‘यशभारत प्राइम टाइम विथ आशीष शुक्ला में उपस्थित हुईं। उन्होंने अपने 33 वर्षीय भजन गायन के सफर को साझा करते हुए बताया कि उनका सबसे प्रसिद्ध भजन ‘चलो बूढ़ी माई, जबलपुर घुमाई दें..। असल में माई ने उनके सपने में यह निर्देश दिया था, जो सपने में पहले साकार हुआ फिर भक्ति गीत के रूप में भी। यह बताते हुए वे भाव-विह्वल हो उठती हैं।
देवी गीत गायिका कहती हैं कि उनके लिये भजन गायिकी पेशा नहीं वरन मां की अराधना है। शायद यही कारण है कि मां ने कभी उनकी बातों की अनदेखी नहीं की। वास्तविकता में उनकी मां से सीधी बात होती है। इसीलिए मां जगदम्बा उनकी हर इच्छा को पूरी करती हैं । आखिरी इच्छा भी यही है कि मां के चरणों में ही मेरी सांसों को विराम मिले।
सजे हैं दरबार, महाकाली के… सविता मिश्रा बताती हैं कि उनके प्रसिद्ध भजनों में * सजे हैं दरबार महाकाली के, महाकाली के खप्पर वाली के… * छत्र छाया में अपनी बसा ले, सोने की छतर वाली मैय्या… * ठंडी, ठंडी चले रे पवन, माई की मडुलिया में… * मां भक्ति में होके चूर…जैसे कई भजन हैं। अब तक उनके लगभग 92 एल्बम निकल चुके हैं, जो टी-सीरीज, मनीष अग्रवाल, सचिन उपाध्याय, सुंदरानी कंपनी व कुछ खुद के द्वारा निकाले गये हैं। वे अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि मंच पर भक्ति गीत गाने वाली वे शहर की पहली महिला हैं।
माता-पिता मेरे पहले गुरु-
वे अपनी भक्ति गीत गायिकी के लिये अपने माता-पिता को गुरु मानती हैं। वे कहती हैं कि जब लोग बच्चियों को घर से निकलने देने नहीं देते थे, तब उन्होंने इस कदम की न केवल सराहना की वरन प्रोत्साहित भी किया। शुरू में घर में ही भजन गाना सीखा, फिर धीरे-धीरे मंच पर। उन्होंने म्यूजिक में बी.एड की भी शिक्षा ली। भजन लिखने का क्रम भी शुरू किया जो अब भी चल रहा है।
जुगनिया मैय्या की नाच रही देखो-
भजन गायिका सविता मिश्रा ने ‘यशभारत प्राइम टाइम विथ आशीष शुक्ला में इस वर्ष आने वाले अपने भजन ‘जुगनिया मैय्या की, नाच रही देखो…को गाकर सुनाया। साथ ही उन्होंने अपने कई अन्य भजनों को भी गाकर उनकी याद ताजा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक सिर्फ भजन ही गाये हैं, फिल्मी गीत कभी नहीं गाये। उन्हें कई बार ऑफर मिला कि ऑर्केस्ट्रा में भजन गाईये, लेकिन उन्होंने इसे कभी स्वीकार नहीं किया।








