कैमोर में एस्बेस्टस के वेस्ट पर उठे सवाल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहुंचे कैमोर, मीडिया से बोले – सरकार से करेंगे बात
रिपोर्ट में खुलासा : 10 लाख टन कचरा बन रहा लोगों के स्वास्थ के लिए खतरा, अब तक डेढ़ हजार से ज्यादा प्रभावित

कटनी, यशभारत। उद्योगनगरी कैमोर में एस्बेस्टस कचरे की जहरीली विरासत को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। ब्रिटेन से पहुंची मीडिया टीम ने कैमोर में दशकों पुराने एस्बेस्टस कचरे और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर जांच की तो दूसरी ओर कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण और नगर परिषद कैमोर की टीम ने दो दिन पहले पहुंचकर वैज्ञानिक आधार पर जांच की। जांच के बाद नमूने केंद्रीय प्रयोगशाला भोपाल भेजे जा रहे हैं। आज इस मामले में कांग्रेस भी हरकत में आ गई। प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कैमोर पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को वे सरकार के संज्ञान में लाएंगे।
कैमोर में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने श्रमिको से मुलाकात की और महिलाओं से बातचीत कर उनकी बीमारी के बारे में जाना। उन्होंने मजदूर यूनियन की ओर कैमोर में रहकर श्रमिको के मामले में जांच कर रहे इंग्लैंड निवासी एडवोकेट विमलेंद्र मुखर्जी से विचार विमर्श किया। एवरेस्ट मजदूर कांग्रेस के प्रतिनिधियों से भी भेंट की। एवरेस्ट की ओर से एचआर दिवाकर द्विवेदी ने उनका स्वागत किया। उमंग सिंघार के साथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला, ग्रामीण अध्यक्ष सौरभ सिंह, कांग्रेस नेता संदीप पप्पू बाजपेयी, पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह चौहान भी कैमोर पहुंचे।
टीम की रिपोर्ट में ये है दावा
गौरतलब है कि ब्रिटेन से पहुंची टीम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस-दूषित कचरा आज भी अलग-अलग इलाकों में मौजूद है। वहीं, स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होने की बात सामने आई है। ब्रिटेन से मीडिया टीम कैमोर पहुंची और शहर के उन इलाकों का जायजा लिया, जहां एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी, धूल और मलबा मौजूद होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कैमोर के खेल मैदानों, आवासीय इलाकों और खुली जमीन पर एस्बेस्टस के टुकड़े आज भी दिखाई देते हैं। जांच के दौरान टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए श्वसन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमोर में 5 हजार से ज्यादा लोग एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। वहीं, पिछले साल आयोजित मेडिकल कैंप में करीब 1200 और लोगों में एस्बेस्टस से संबंधित बीमारी के लक्षण सामने आने की बात कही गई है। विशेषज्ञ डॉक्टर के मुताबिक कैमोर में एस्बेस्टस के संपर्क का असर बेहद गंभीर है। सांस की बीमारी, इलाज का भारी खर्च और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा यहां के लोगों के सामने है।
कैमोर के सोमेश की कहानी चर्चा में
रिपोर्ट में कैमोर के 40 वर्षीय सोमेश की कहानी भी सामने आई है। परिवार का दावा है कि बचपन में खेल मैदान में एस्बेस्टस के संपर्क में आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कैमोर छोड़कर कहीं और जा सकें। जांच के दौरान पूर्व फैक्ट्री कर्मचारियों के परिवारों से भी बात की गई। आरोप है कि काम के दौरान कर्मचारियों को एस्बेस्टस के खतरे से बचाव के पर्याप्त साधन और जानकारी नहीं दी गई। विदेशी मीडिया ने 1970 के दशक के कंपनी के कुछ आंतरिक दस्तावेज भी सामने रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन दस्तावेजों में कंपनी के एक डॉक्टर ने भारतीय श्रमिकों को एस्बेस्टस के खतरों से बेहतर तरीके से बचाने और उन्हें जोखिम के बारे में जानकारी देने की जरूरत बताई थी।
जिम्मेदारी आखिर किसकी
टर्नर एंड न्यूऑल का बाद में पतन हुआ, लेकिन कैमोर में छोड़े गए एस्बेस्टस कचरे की समस्या आज भी बनी हुई है। रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि इस पुराने औद्योगिक कचरे को हटाने और प्रभावित लोगों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों ने कैमोर को सुरक्षित बनाने की लागत 100 मिलियन पाउंड से अधिक होने का अनुमान जताया है। वहीं, कॉरपोरेट जवाबदेही और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर ब्रिटेन में भी कानून और जिम्मेदारी पर बहस जारी है। बताया जा रहा है कि एस्बेस्टस से जुड़ा यह कारोबार बाद में दूसरी कंपनियों के हाथों में गया और अब इससे जुड़ी औद्योगिक संपत्ति सोमानी ग्रुप के पास होने की बात कही जा रही है। हालांकि, कैमोर में मौजूद पुराने कचरे की जिम्मेदारी और उसके निस्तारण को लेकर स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है। कैमोर की एस्बेस्टस समस्या अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है। ब्रिटेन से आई जांच के बाद यह मामला एक बार फिर पर्यावरण, स्वास्थ्य, मुआवजे और कॉरपोरेट जवाबदेही के बड़े सवाल खड़े कर रहा है।







