इंदौरकटनीग्वालियरजबलपुरदेशबिज़नेसभोपालमध्य प्रदेशमध्यप्रदेशराज्य

GST में बड़ा बदलाव: गिरफ्तारी का अधिकार खत्म, रिफंड और ITC के नियम होंगे आसान

ई-कॉमर्स और निर्यात कारोबार तक, नई व्यवस्था में घटेगा अनुपालन का बोझ :अभिषेक ध्यानी

जबलपुर,यश भारत। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में इस बार टैक्स की दरों में बदलाव के बजाय GST व्यवस्था को सरल बनाने, कारोबारियों का अनुपालन बोझ घटाने और विवादों को कम करने पर जोर रहा। बैठक में GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने, ₹5 करोड़ तक की सीमा में अभियोजन संबंधी राहत, छोटे टैक्स विवादों में नोटिस की सीमा तय करने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC के दायरे को बढ़ाने जैसे अहम फैसले किए गए हैं।

इन फैसलों और इनके व्यावहारिक असर को लेकर अभिषेक ध्यानी, एडवोकेट एवं सदस्य, GST GRC की मध्यप्रदेश सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर (IAS) के साथ विस्तृत चर्चा हुई। चर्चा में खास तौर पर इस बात पर जोर रहा कि GST व्यवस्था का अगला चरण केवल राजस्व संग्रह तक सीमित न होकर कारोबारी के लिए सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद होना चाहिए।

गिरफ्तारी की शक्ति खत्म, अभियोजन की सीमा बढ़ी

GST व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को खत्म करने और अभियोजन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने से जुड़ा है। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जिनके मामले कर चोरी के गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आते। सरकार ने छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
काउंसिल ने ₹10 हजार या उससे कम की निर्धारित कर मांग वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस नहीं जारी करने का निर्णय लिया है। पहले से लंबित ऐसे नोटिस वापस लेने की बात भी सामने आई है। इससे छोटी-छोटी कर मांगों को लेकर चलने वाली लंबी प्रक्रिया में कमी आने की उम्मीद है।

1200 675 27788370 786 27788370 1791122269438

रिफंड होगा तेज, कैश लेजर का पैसा अपने आप वापस

रिफंड आवेदन की स्वीकृति की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का निर्णय लिया गया है। जोखिम आधारित जांच के बाद करीब 90 प्रतिशत पात्र रिफंड को सिस्टम के माध्यम से तेजी से मंजूरी देने की व्यवस्था की गई है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी स्वचालित प्रक्रिया से होगा, जिससे अधिकारी के स्तर पर होने वाला अनावश्यक हस्तक्षेप कम होगा।
कर्मचारियों के लिए ली गई स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर ITC से जुड़ी राहत दी गई है। टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन पर भी ITC की सुविधा का दायरा बढ़ाया गया है। फ्री सैंपल और कानून के तहत नष्ट किए गए एक्सपायर्ड स्टॉक को लेकर भी ITC व्यवस्था में राहत का प्रावधान किया गया है।

इनवर्टेड ड्यूटी में फंसा पैसा भी लौटेगा

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में अब इनपुट सर्विसेज से जुड़े ITC को भी रिफंड के दायरे में लाया गया है। यह सुविधा 1 नवंबर 2026 से उपलब्ध क्रेडिट पर लागू होगी। प्लांट और मशीनरी से जुड़े ITC के रिफंड का रास्ता भी खोला गया है, जिसमें 1 अप्रैल 2027 से 1/60वें हिस्से के आधार पर मासिक रिफंड की व्यवस्था होगी। ₹5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले केवल B2C कारोबारियों के लिए टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करते हुए सालाना रिटर्न दाखिल करने का विकल्प दिया जाएगा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को कारोबारी स्थान के रूप में घोषित करने की सुविधा भी दी गई है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों में व्यापार विस्तार आसान करना है।

रजिस्ट्रेशन और रद्दीकरण की प्रक्रिया होगी आसान

कम जोखिम वाले आवेदकों का GST रजिस्ट्रेशन तीन कार्यदिवस में स्वचालित तरीके से करने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। ट्रेड नेम, पार्टनर या डायरेक्टर और अतिरिक्त कारोबारी स्थान जैसी सामान्य जानकारियों में बदलाव भी ऑटो-अप्रूवल के दायरे में आएंगे। छोटे करदाताओं के GST रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन और अनुपालन पूरा होने के बाद बहाली की प्रक्रिया को भी आसान किया जाएगा।
माल के आवागमन के दौरान अलग-अलग राज्यों में बार-बार जांच और रोक की व्यवस्था को सीमित करने का प्रावधान किया गया है। निर्धारित परिस्थितियों में ही वाहन रोकने की कार्रवाई होगी। इसका उद्देश्य परिवहन कारोबार में अनावश्यक देरी और दोहराई जाने वाली जांच को कम करना है।

निर्यात और विदेशी ग्राहकों के लिए भी बदलाव

विदेशी ग्राहकों के माल पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, रिसर्च, सर्टिफिकेशन या प्रोसेसिंग जैसी सेवाओं को निर्यात सेवा के रूप में मान्यता देने की दिशा में बदलाव किया गया है। भारतीय कंपनियों की विदेशी शाखाओं के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं से जुड़े निर्यात लाभों को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में GST की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस बार मुख्य जोर रेट बदलने के बजाय प्रक्रिया, ITC, रिफंड, पंजीयन, विवाद समाधान और कारोबारी अनुपालन को आसान बनाने पर रहा। भविष्य में GST दरों की समीक्षा साल में एक बार करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।

अभिषेक ध्यानी के मुताबिक, असली बदलाव लागू होने के बाद दिखेगा

GST से जुड़े इन बदलावों को लेकर अभिषेक ध्यानी, एडवोकेट एवं सदस्य, GST GRC का कहना है कि काउंसिल के फैसलों का वास्तविक महत्व इनके जमीनी क्रियान्वयन में होगा। कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी राहत तभी मानी जाएगी, जब रजिस्ट्रेशन, रिफंड, ITC और विवाद समाधान की प्रक्रियाएं वास्तव में समयबद्ध और कम हस्तक्षेप वाली बनें। GST का अगला चरण करदाता और विभाग के बीच भरोसे पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button