25 साल की सत्ता नहीं, मिशन की राजनीति, मोदी बोले- एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीया, जिसने गिराया उसी ने खड़ा होना सिखाया

नई दिल्ली,यशभारत। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर अपनी राजनीतिक यात्रा को सत्ता की उपलब्धियों से ज्यादा संघर्ष, संगठन और मिशन की कहानी बताया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं। जीवन में क्या बनूंगा, कभी सोचा ही नहीं।” उन्होंने कहा कि जिसने उन्हें गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया और जिसने विरोध किया, उसने लोकतंत्र की शक्ति समझाई।
2001 में गुजरात की कमान संभालने के बाद मोदी ने करीब 13 साल तक राज्य का नेतृत्व किया। 2014 में भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद वे प्रधानमंत्री बने। 2019 में भाजपा ने फिर बहुमत हासिल किया और 2024 में एनडीए की सरकार के साथ मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। इस तरह गुजरात से शुरू हुआ उनका सत्ता-सफर राष्ट्रीय राजनीति में लंबे निरंतर नेतृत्व में बदल गया।
मोदी ने अपने 25 साल के राजनीतिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन व्यक्तिगत उपलब्धियों से करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा।” उन्होंने भारत में जन्म और देश की सेवा के अवसर को सत्ता और पद-प्रतिष्ठा से बड़ा बताया।
उनकी राजनीति का दूसरा बड़ा पहलू लगातार टकराव रहा है। गुजरात में शासन मॉडल को लेकर कांग्रेस और विपक्ष से संघर्ष से लेकर केंद्र में आर्थिक नीतियों, नोटबंदी, जीएसटी, कृषि कानून, नागरिकता कानून और अन्य फैसलों पर हुए विरोध तक मोदी सरकार को संसद और सड़क दोनों जगह राजनीतिक चुनौती मिलती रही। समर्थक इसे निर्णायक फैसलों की राजनीति बताते हैं, जबकि विपक्ष इन्हीं फैसलों के प्रभाव और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाता रहा है।
मोदी ने अपने संबोधन में कर्म को अपनी राजनीति का आधार बताया। कहा, “कर्म ही मेरा धर्म है।” गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि काम और प्रयास रुकना नहीं चाहिए तथा फल की चिंता किए बिना देश के लिए पूरी क्षमता से काम करते रहना चाहिए।
कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने अगले लक्ष्यों का भी खाका रखा
विकसित भारत 2047, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष में आगे बढ़ता भारत। इन लक्ष्यों पर उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा—”वी विल डू इट।
25 साल की इस यात्रा में मोदी का संदेश साफ रहा
सत्ता अंतिम मंजिल नहीं, मिशन का माध्यम है; विरोध चुनौती है और हर चुनौती अगले लक्ष्य की सीढ़ी।







