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मिट्टी से गढ़ी जा रही आस्था, दुर्गा प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार

जबलपुर, यश भारत। शारदीय नवरात्रि में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन संस्कारधानी में दुर्गोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में मूर्तिकार दिन-रात मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। कहीं प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो कहीं रंग-रोगन और सजावट का काम शुरू हो चुका है। पंडालों के निर्माण की तैयारियां भी गति पकड़ने लगी हैं। जबलपुर में तैयार होने वाली दुर्गा प्रतिमाएं अपनी बारीक कलाकारी और जीवंत चेहरे के लिए देशभर में पहचान रखती हैं। मूर्तिकार मिट्टी से प्रतिमा का स्वरूप इस तरह गढ़ते हैं कि तैयार होने के बाद मां की प्रतिमा सजीव नजर आती है। चेहरे की भाव-भंगिमा से लेकर मुकुट, आभूषण और श्रृंगार तक हर हिस्से में कलाकार महीन कारीगरी करते हैं।

कहीं मां दुर्गा का भव्य रूप, कहीं काली का स्वरूप

इस बार दुर्गोत्सव में शहर के अलग-अलग पंडालों में मां दुर्गा के विविध स्वरूप देखने को मिलेंगे। कहीं भव्य दरबार सजाने की तैयारी है तो कहीं मां दुर्गा को राक्षसों का संहार करते हुए दिखाया जाएगा। कई स्थानों पर मां काली की आकर्षक प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकार इन दिनों प्रतिमाओं की रंग-सज्जा और अंतिम रूप देने के काम में व्यस्त हैं।

प्रदेश से बाहर तक पहुंचती हैं जबलपुर की प्रतिमाएं

जबलपुर में बनने वाली प्रतिमाओं की मांग मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में रहती है। शहर में तैयार प्रतिमाएं सतना, रीवा, अशोकनगर, नर्मदापुरम, रायपुर, बांदा, नरसिंहपुर, गाडरवारा, करेली, गोटेगांव, कटनी, दुर्ग, भिलाई, गुना, मुंगावली, सिवनी और शहडोल सहित अनेक स्थानों तक भेजी जाती हैं। कई समितियों के लोग प्रतिमाएं लेने के लिए खुद ट्रक लेकर जबलपुर पहुंचते हैं।

कोलकाता के बाद जबलपुर की विशेष पहचान

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जानकारों के अनुसार दुर्गा प्रतिमा निर्माण की कलाकारी में कोलकाता के बाद जबलपुर की प्रतिमाओं की विशेष पहचान है। प्रतिमाओं के चेहरे की भाव-भंगिमा, आकर्षक श्रृंगार और बारीक नक्काशी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यही वजह है कि नवरात्रि नजदीक आते ही शहर के मूर्तिकारों के पास प्रतिमाओं के ऑर्डर बढ़ने लगते हैं। इस समय प्रतिमा निर्माण स्थलों पर दिन-रात हथौड़ी, मिट्टी और रंगों के बीच कलाकार आस्था को आकार देने में जुटे हैं।

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